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घुसपैठियों का अब क्या? भारत निकाल रहा, बांग्लादेश घुसने नहीं देता

पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों की घर वापसी के दौरान सीमा पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जहाँ दस लोगों को होल्डिंग सेंटर में रखा गया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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घुसपैठीयों को BSF ने होल्डिंग सेन्टर में रखा

जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की नई सरकार द्वारा अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अपनाए गए सख्त रुख के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। हाल ही में जलपाईगुड़ी के पास भारत-बांग्लादेश सीमा पर उस समय तनाव फैल गया, जब दस बांग्लादेशी नागरिकों को उनके अपने ही देश में प्रवेश करने से रोक दिया गया। दो दिनों तक 'जीरो लाइन' पर खुले आसमान के नीचे रहने के बाद, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने इन लोगों को हिरासत में लेकर जलपाईगुड़ी स्थित एक होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है।[1]

यह समूह पिछले दो दिनों से सीमा पर बनी कांटेदार बाड़ के पास फंसा हुआ था। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, जब ये नागरिक अपनी मातृभूमि में वापस जाने का प्रयास कर रहे थे, तो सीमा के उस पार स्थानीय निवासियों ने उनका विरोध किया। इसके अतिरिक्त, बांग्लादेशी सीमा रक्षक (BGB) पर भी यह आरोप लगा है कि उन्होंने अपने ही नागरिकों को देश में प्रवेश करने से रोका। इस स्थिति के चलते ये लोग बीच सीमा पर ही फंसे रह गए, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।

होल्डिंग सेंटर में जत्था

सोमवार की सुबह सीमा सुरक्षा बल की 39वीं बटालियन ने इन दस बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में ले लिया। इनमें दो परिवार शामिल हैं, जिनमें बच्चे भी मौजूद हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान मोहम्मद अब्दुल सलाम, उनकी पत्नी यास्मीन और उनके छह वर्षीय बेटे मोहम्मद इरफान इस्लाम के रूप में हुई है, जो बेनापोल के निवासी हैं। इसके अलावा समूह में कुश्तिया, चट्टोग्राम, सतखिरा और खुलना जिलों के नागरिक भी शामिल हैं। इन सभी को फिलहाल कोतवाली थाना ले जाकर प्रक्रिया पूरी करने के बाद होल्डिंग सेंटर भेजा गया है।

कोतवाली थाना सूत्रों के अनुसार, इन बांग्लादेशी नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक होल्डिंग सेंटर में ही रखा जाएगा। उन्हें नियमानुसार वापस उनके देश भेजा जाएगा। ये लोग काफी समय से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे, लेकिन हालिया प्रशासनिक सख्ती के बाद उन्होंने स्वयं ही अपने देश लौटने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उनके अपने ही देश द्वारा उन्हें स्वीकार न करने से यह मानवीय संकट और अधिक गहरा गया है।

"बांग्लादेशी सरकार अपने नागरिकों की वापसी नहीं चाहती है। 'जीरो पॉइंट' पर दो दिन फंसाए रखने के बाद, बीएसएफ ने उन्हें होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित कर दिया है। हम सिर्फ यही चाहते हैं कि उन्हें कानूनी तरीके से उनके देश वापस भेजा जाए," दिलिप कुमार दास, बेरूबारी ग्राम पंचायत के उप प्रमुख ने कहा।

बढ़ती प्रशासनिक सख्ती

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने घुसपैठियों को एक बड़ा मुद्दा बनाते हुए इसे नियंत्रित करने का संकल्प लिया है। खबरों के अनुसार, राज्य के विभिन्न सीमावर्ती जिलों में बने होल्डिंग सेंटरों से अब तक करीब 4,800 अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है, जबकि 836 अन्य लोगों को डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को 100 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त बाड़ लगाने के लिए भूमि भी सौंप दी है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार ने 556 किलोमीटर की पूरी सीमा पर फेंसिंग का लक्ष्य रखा है। यह घटना दर्शाती है कि अवैध घुसपैठियों की घर वापसी के मार्ग में केवल प्रशासनिक चुनौतियां ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश के असहयोगात्मक रवैये के कारण कूटनीतिक जटिलताएं भी उत्पन्न हो रही हैं। फिलहाल, प्रशासन इन दस प्रवासियों की घर वापसी के लिए कानूनी विकल्पों पर काम कर रहा है ताकि सीमा पर शांति बनी रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अवैध प्रवासी नागरिकों के डिपोर्टेशन की प्रक्रिया सरकारी नियमों और कानूनों के अधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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