प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दस वर्ष पूरे होने पर जिलेभर में विशेष जांच शिविर आयोजित किए गए, जिसमें ढाई हजार से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य लाभ मिला।
विशेष प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) शिविर
बीकानेर, राजस्थान। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के सफलतापूर्वक दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीकानेर जिलेभर में एक विशेष उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न अस्पतालों में विशेष प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) शिविर आयोजित किए गए, जिन्होंने मातृ स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता का संचार किया। इस अभियान के एक दशक पूर्ण होने की खुशी में कई स्थानों पर केक काटकर और गर्भवती महिलाओं को पोषण प्रोत्साहन के रूप में गुड़, चना और नारियल वितरित कर समारोह मनाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध के अनुसार, इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा है। अभियान के तहत चिकित्सकों द्वारा व्यापक प्रसवपूर्व जांच की गई, जिसमें पेट की जांच, वजन, ऊंचाई, रक्त एवं मूत्र की जांच जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल रहीं। आवश्यकतानुसार मां वाउचर जारी कर निःशुल्क सोनोग्राफी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, ताकि एनीमिया जैसी समस्याओं से ग्रसित गर्भवतियों को समय पर उपचार मिल सके और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का लाभ उन तक पहुँच सके।
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भवानीशंकर गहलोत ने जानकारी दी कि बीकानेर जिले के लगभग 120 चिकित्सा संस्थानों पर इन विशेष एएनसी शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ढाई हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जो इस अभियान की लोकप्रियता और उपयोगिता को दर्शाता है। इस दौरान चिकित्सकों ने न केवल सुरक्षित प्रसव के लिए आवश्यक योजनाएं तैयार कीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और पोषण के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दस वर्षों के सफर में यह कार्यक्रम मातृ मृत्यु दर को कम करने में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। 9 जून 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की स्वास्थ्य सेवाओं की खाई को पाटने का कार्य किया है। आज यह अभियान न केवल 9 तारीख को, बल्कि महीने की 18 और 27 तारीख को भी नियमित रूप से आयोजित हो रहा है, जिससे अधिकाधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है।
"प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एनीमिया से ग्रसित गर्भवतियों को मौके पर ही एफसीएम इंजेक्शन की डोज दी गई, ताकि उनकी स्थिति में समय रहते सुधार लाया जा सके।"
अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब हर महीने तीन बार शिविर आयोजित किए जाते हैं। चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले ये शिविर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को हर जरूरतमंद महिला के द्वार तक पहुँचाने का माध्यम बन गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान करने में बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाती है।
इन शिविरों की निरंतरता ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य जांच से वंचित न रहे। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। भविष्य में भी विभाग का यही प्रयास है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में और अधिक सुधार किया जाए और इस प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को जन-जन तक पहुँचाया जाए ताकि समाज का हर वर्ग स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से संबंधित आंकड़े और कार्यक्रम विवरण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।