प्रादेशिक

इस्तीफे के बाद भी आक्रोश, नर्सिंग हड़ताल ने पकड़ा जोर

रेणु भाटिया के इस्तीफे के बावजूद नर्सिंग समुदाय माफी की मांग पर अड़ा है। आज दो घंटे और गुरुवार को पूरे दिन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।

By अजय त्यागी 1 min read
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नर्सेज का विरोध प्रदर्शन

हरियाणा। हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया के इस्तीफे के बावजूद राज्य के सरकारी अस्पतालों में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। नर्सिंग समुदाय का आक्रोश अभी भी चरम पर है और वे चेयरपर्सन द्वारा किए गए विवादित बयानों के लिए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग पर अडिग हैं। अपनी इस मांग को मनवाने के लिए नर्सिंग कर्मियों ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। आज सुबह 10 से 12 बजे तक अस्पतालों में दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा असर पड़ा है।[1]

नर्सिंग एसोसिएशन ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि इस्तीफा विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि सम्मान की बहाली के लिए सार्वजनिक माफी अनिवार्य है। इस कड़ी में, कर्मियों ने आगामी गुरुवार को पूरे दिन की पूर्ण हड़ताल (स्ट्राइक) का ऐलान कर दिया है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा सकती हैं। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि उनकी छवि को जो ठेस पहुंची है, उसकी भरपाई बिना माफी के संभव नहीं है।

इस्तीफा और विवाद की जड़

रेणु भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन नर्सिंग कर्मियों की नाराजगी शांत नहीं हुई है। नर्सों का आरोप है कि इस्तीफा देना उनकी जिम्मेदारी से भागना है, जबकि उन्होंने जो आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था, वह पूरे समुदाय के लिए अपमानजनक है। हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है और जल्द ही मानहानि का केस दर्ज कराने के साथ ही एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ था जब 7 जून को कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग का डॉक्टर द्वारा शारीरिक शोषण करने से जुड़ी घटना की जांच के दौरान चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने नर्सिंग स्टाफ पर सवाल उठाए थे। उस वक्त उन्होंने विवादित शब्दों का प्रयोग किया था, जिसने नर्सिंग स्टाफ की कार्यप्रणाली और उनकी गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए थे। इसी अपमान के विरोध में नर्सों ने सबसे पहले कुरुक्षेत्र में आवाज उठाई थी।

दरअसल, रेणु भाटिया ने उस समय कहा था-

"क्या आपकी कोई बेटी है? क्या मैं आपकी बेटी को किसी आदमी के साथ 15 मिनट के लिए अकेला छोड़ दूँ? आप भी इसमें बराबर के शामिल हैं क्योंकि आपने उसे ऐसा करने का मौका दिया; इसमें सभी नर्सों की मिलीभगत है।"

वहीं दूसरी और नर्सेज का कहना है कि-

"इस्तीफा हमारी समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। जब तक चेयरपर्सन सार्वजनिक रूप से पूरे नर्सिंग समुदाय से माफी नहीं मांगतीं, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा और गुरुवार को हम पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे।"

हड़ताल का असर और कानूनी कार्रवाई

नर्सिंग हड़ताल के कारण राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित होने से चिकित्सा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। नर्सिंग एसोसिएशन का कहना है कि वे मरीजों की पीड़ा समझते हैं, लेकिन चेयरपर्सन के अहंकारी व्यवहार ने उन्हें हड़ताल के लिए मजबूर किया है। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने भी इस लड़ाई में उनका साथ देने का निर्णय लिया है, जिससे अब यह मामला और गंभीर हो गया है।

कानूनी मोर्चे पर भी एसोसिएशन कोई ढिलाई नहीं बरत रही है। मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की तैयारी के साथ-साथ, वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रशासन ऐसी भाषा का उपयोग करने वाले पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ सख्त आचार संहिता लागू करे। स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुरुक्षेत्र के सीएमओ को पहले ही बर्खास्त कर दिया है, लेकिन नर्सों का लक्ष्य अब केवल चेयरपर्सन की सार्वजनिक माफी है।

प्रशासन की चुनौती और भविष्य

हरियाणा सरकार के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखना जरूरी है, तो दूसरी ओर नर्सिंग समुदाय का सम्मान भी एक बड़ा मुद्दा है। यदि गुरुवार को नर्सिंग कर्मियों का पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू होता है, तो राज्य की चिकित्सा व्यवस्था ठप हो सकती है। सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना होगा ताकि विवाद का अंत हो और अस्पतालों में पुनः सामान्य कामकाज शुरू हो सके।

नर्सिंग समुदाय का स्पष्ट संदेश है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद भी जिस तरह से हड़ताल का दायरा बढ़ा है, उससे यह साफ है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जिसने नर्सिंग स्टाफ की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। गुरुवार का दिन स्वास्थ्य विभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसी दिन यह तय होगा कि क्या सरकार इस नर्सिंग हड़ताल को समय रहते संभाल पाती है या स्थिति और बिगड़ती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। रेणु भाटिया के इस्तीफे और नर्सिंग कर्मियों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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