तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक सरकारी अधिकारी के बेहिसाब एसेट का भंडाफोड़ किया है जिससे प्रशासनि
गिरफ्तार अधिकारी और बरामद एसेट
हैदराबाद, तेलंगाना। राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली छापेमारी को अंजाम दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान विभाग के अधिकारियों को भारी मात्रा में नकद राशि, सोने के बिस्कुट, महंगे फ्लैट और विदेशी शराब की बोतलें बरामद हुई हैं। इस छापेमारी ने सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की जड़ों को एक बार फिर सबके सामने उजागर कर दिया है।[1]
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दल ने यह पूरी कार्रवाई पूरी गोपनीयता और पुख्ता इनपुट्स के आधार पर की थी। जांच एजेंसी को लंबे समय से इस बात की शिकायतें मिल रही थीं कि उक्त अधिकारी अपनी वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित कर रहा है। इन शिकायतों की सत्यता जांचने के बाद जब एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी गई, तो वहां का नजारा देखकर खुद जांच अधिकारी भी पूरी तरह दंग रहे गए।[विडियो]
इस पूरी कार्रवाई के दौरान सरकारी अधिकारी के बेहिसाब एसेट की जो सूची सामने आई है वह बेहद चौंकाने वाली है। जांच एजेंसी को शुरुआती जांच में करीब सत्रह करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। हालांकि बाजार की मौजूदा कीमतों के हिसाब से इस पूरी संपत्ति का कुल मूल्यांकन एक सौ पचास करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जांच दल को छापेमारी के दौरान अलग-अलग शहरों में आलीशान फ्लैट, कई एकड़ कृषि भूमि, एक बहुमंजिला विला और आलीशान मकानों के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही घर से भारी मात्रा में कीमती सोने के बिस्कुट और विदेशी ब्रांड की महंगी शराब की बोतलें भी बरामद की गई हैं। इन संपत्तियों के दस्तावेजों को देखकर अधिकारी हैरान हैं कि एक सरकारी सेवा में रहते हुए इतनी अकूत संपत्ति कैसे बनाई गई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सड़क और भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ मोहन नायक को गिरफ्तार कर लिया है। सरकारी अधिकारी के बेहिसाब एसेट की जांच के लिए जांच एजेंसी की टीमों ने एक साथ कुल सोलह अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की प्रक्रिया को पूरा किया था। इस कार्रवाई के बाद आरोपी अधिकारी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही यह गिरफ्तारी की गई है। आरोपी अधिकारी लंबे समय से विभाग में ऊंचे पदों पर तैनात था और उसके रसूख के कारण कोई उसके खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इस कार्रवाई ने साबित किया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।
"हमने हैदराबाद और निजामाबाद में एक साथ तलाशी अभियान चलाया है। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना, सोने के बिस्कुट और संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। आरोपी मोहन नायक को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जल्द ही अदालत में पेश किया जा रहा है।" - प्रवीण कुमार, संयुक्त निदेशक
पकड़े गए अधिकारी ने लगभग उनतीस साल पहले सरकारी सेवा में कदम रखा था और अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उसने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं। वह पूर्व में अधीक्षण अभियंता के रूप में भी कार्य कर चुका था और पिछले साल ही उसे एक बड़े विभाग में प्रबंध निदेशक और बाद में इंजीनियर इन चीफ के सर्वोच्च पद पर पदोन्नत किया गया था।
विभाग में रहते हुए उस पर बड़े प्रोजेक्ट्स के बिलों को मंजूरी देने के बदले में ठेकेदारों से भारी कमीशन वसूलने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। बुनियादी ढांचा निर्माण से जुड़े कार्यों में उसकी भूमिका हमेशा संदिग्ध मानी जाती थी। सरकारी अधिकारी के बेहिसाब एसेट की इस जांच में अभी कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि कई बैंक खातों की जांच अभी बाकी है।
अस्वीकरण:
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। इस सरकारी अधिकारी के बेहिसाब एसेट और अदालती कार्यवाही को लेकर जांच अभी प्रक्रियाधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।