पीबीएम अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ
गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश
बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और इलाज में गंभीर लापरवाही के कारण किडनी फेलियर का मामला सामने आया है। इस संवेदनशील घटना ने देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में तूल पकड़ लिया है जिसके बाद चिकित्सा प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा की अगुवाई में स्थानीय ट्रॉमा सेंटर से लेकर पीबीएम अधीक्षक कार्यालय तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पीबीएम अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश जताते हुए जोरदार नारेबाजी की और अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया।
गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश में आयोजित पैदल मार्च और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता विजय सिंह शेखावत और रामनिवास कूकणा ने पीबीएम अस्पताल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्थाओं की बदहाली और अस्पताल को अवव्यवस्थाओं व भ्रष्टाचार का अड्डा बताते-बताते रामनिवास कूकणा भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर लापरवाही के कारण किसी भी प्रसूता की मौत हो गई तो ईंट से ईंट बजा दी जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही छात्र नेता हरिराम गोदारा सहित अन्य लोगों ने भी पीबीएम अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की।
इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश के इस घटनाक्रम में बीकानेर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष विजय सिंह शेखावत एवं रामनिवास कूकना के संयुक्त नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीबीएम अस्पताल का दौरा किया। यहाँ उन्होंने इलाज में हुई गंभीर लापरवाही के कारण प्रभावित हुई प्रसूताओं के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। परिजनों द्वारा नेताओं को सुनाई गई आपबीती अत्यंत हृदयविदारक एवं चिंताजनक थी। नेताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मातृत्व जैसे संवेदनशील विषय में हुई इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
इस गंभीर मामले को लेकर पीबीएम अस्पताल प्रशासन को गहरी नींद से जगाने और चेताने हेतु यह आक्रोश रैली निकाली गई थी। रैली के समापन पर अस्पताल अधीक्षक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया जिसमें दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग की गई। विजय सिंह शेखावत एवं रामनिवास कूकना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अस्पताल प्रशासन की प्रथम जिम्मेदारी प्रभावित प्रसूताओं को बेहतर एवं समुचित उपचार उपलब्ध कराकर उन्हें पूर्णतः स्वस्थ करना है। यदि इस मामले में जरा भी ढिलाई बरती गई या दोषियों को बचाने का प्रयास हुआ तो जनहित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
कांग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष ने अस्पताल परिसर से इस लापरवाही के खिलाफ अपनी आवाज को और बुलंद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। प्रशासन को माताओं और बहनों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती।
"माताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा, न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।- विजय सिंह शेखावत, जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस पार्टी बीकानेर"
इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ आक्रोश की इस मुहिम में स्थानीय नागरिकों और विभिन्न छात्र संगठनों का भी पूरा समर्थन देखने को मिला। छात्र नेता हरिराम गोदारा ने पीबीएम अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संभाग के इतने बड़े चिकित्सा केंद्र में ऐसी लापरवाही विभागीय विफलता को दर्शाती है। यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में आमूलचूल सुधार नहीं किया गया, तो प्रशासन को जनता के उग्र विरोध का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
मार्च के अंत में सभी प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी दी कि इस पूरे किडनी फेलियर मामले की निष्पक्ष जांच समय सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता में पीबीएम अस्पताल के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करने को तैयार हैं और इस मामले की नियमित निगरानी रखी जाएगी।
अस्वीकरण:
यह रिपोर्ट पीड़ित परिवारों के बयानों एवं प्रत्यक्षदर्शी जन प्रतिनिधियों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। चिकित्सा संबंधी जांच एवं व्यवस्थाओं का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक व मेडिकल बोर्ड के अधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।