बीज निगम मामले में हुई कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश देखने को मिला। विपक्षी दल के नेताओं ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस की प्रेस वार्ता
बीकानेर, राजस्थान। राजस्थान राज्य बीज निगम के पूर्व निदेशक और पांच अन्य व्यक्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश देखने को मिल रहा है। जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। करीब ढाई करोड़ रुपए की भारी नकदी बरामदगी के इस गंभीर मामले ने अब पूरी तरह से राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस बड़े प्रशासनिक और आर्थिक घपले को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने वर्तमान राज्य सरकार, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कैबिनेट कृषि मंत्री के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद समूचे प्रशासनिक तंत्र में मचे हड़कंप के बीच जनता की नजरें अब आगामी जांच पर टिकी हुई हैं।
बीकानेर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान अनूपगढ़ विधायक एवं बीकानेर संभाग कांग्रेस प्रभारी शिमला नायक और कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी नकदी की बरामदगी सामान्य घटना नहीं है, इसलिए इसके पीछे छुपे बड़े चेहरों को बेनकाब किया जाना बेहद जरूरी है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश के आम नागरिकों और किसान संगठनों के बीच भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश साफ तौर पर देखा जा रहा है जो इस लचर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विधायक शिमला नायक ने राज्य सरकार और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर और हैरान करने वाले आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने तथ्यों के साथ दावा किया कि यह पूरा मामला केवल कुछ लाख रुपए की सामान्य रिश्वतखोरी तक ही सीमित नहीं है। बल्कि इसके गहरे तार नकली बीजों के सैंपल को जबरन पास करवाने, सरकारी एजेंसियों द्वारा जब्त किए गए अवैध माल को सांठगांठ करके छुड़ाने और निर्दोष खाद-बीज कारोबारियों पर डरा-धमकाकर की जाने वाली कथित वसूली के संगठित तंत्र से जुड़े हुए हैं।
इस घिनौने खेल के तार सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं और खुद विभागीय कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा के कार्यालय तक जुड़े होने की बात कही जा रही है। देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने इन आरोपों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विभागीय संरक्षण के बिना इतना बड़ा आर्थिक साम्राज्य और अवैध वसूली का खेल लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता। इस खुलासे के बाद से ही क्षेत्र के पीड़ित किसानों और ईमानदार व्यापारियों के मन में वर्तमान सरकार की नीतियों और दावों के प्रति असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश पनप रहा है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने प्रेस वार्ता के दौरान सीधे तौर पर कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग बुलंद की है। नेताओं ने तर्क दिया कि जब उनके अधीन आने वाले सबसे महत्वपूर्ण विभाग के शीर्ष स्तर से जुड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इतनी बड़ी नकदी के साथ कार्रवाई की है, तो मंत्री को अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से इस पूरे संवेदनशील प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध उच्च स्तरीय जांच करवाने की पुरजोर वकालत की है।
"जब विभाग के शीर्ष पदों पर बैठे लोग करोड़ों रुपए की नकदी के साथ रंगे हाथों पकड़े जा रहे हों, तो विभागीय मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से उन्हें बर्खास्त करना चाहिए और इस पूरे तंत्र की कड़ियों को जनता के सामने लाना चाहिए।"
देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने मामले को और स्पष्ट करते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए पूर्व निदेशक जुगल किशोर विश्नोई की नोखा क्षेत्र में एक व्यावसायिक फर्म संचालित है। इस विशेष फर्म में नोखा के पूर्व विधायक के अत्यंत करीबी परिजनों की सीधी व्यावसायिक साझेदारी होने की बातें सार्वजनिक हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संदिग्ध व्यावसायिक संबंध की भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गहनता से जांच की जानी चाहिए क्योंकि इससे पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक गठजोड़ के कई नए और चौंकाने वाले सवाल खड़े होते हैं।
इसके अलावा कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि इस कथित भ्रष्टाचार के षड्यंत्र के तार फलोदी क्षेत्र के वर्तमान विधायक तक भी जुड़े हो सकते हैं। इस आशंका को बल तब मिला जब इस मामले में फलोदी विधायक के निजी सहायक यानी पीए की गिरफ्तारी जांच एजेंसी द्वारा सुनिश्चित की गई। निजी सहायक की इस अचानक हुई गिरफ्तारी ने कई बड़े संदेहों को जन्म दे दिया है जिनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच किया जाना अत्यंत आवश्यक है। विपक्ष का मानना है कि यदि जांच का दायरा बढ़ाया जाए तो कई प्रभावशाली राजनेताओं के नाम उजागर होंगे। इन तीखे सवालों के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश देखने को मिला।
प्रेस वार्ता के अंत में शिमला नायक और बिशनाराम सियाग ने वर्तमान सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सभी दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। यदि इस पूरे तंत्र को राजनीतिक दबाव में दबाने या बचाने का प्रयास किया गया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के हित में पूरे प्रदेश भर में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करेगी। विपक्ष ने मांग की है कि जनता के सामने यह सच आना ही चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी भारी रकम किसके इशारे पर और किस चुनावी या व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए एकत्र की जा रही थी।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि मंडियों में सरकार की साख को गहरा धक्का लगा है और आम उत्पादकों के बीच आक्रोश है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का तीखा आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। कांग्रेस ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से मांग की है कि वह बिना किसी राजनीतिक भेदभाव और दबाव के अपनी जांच का दायरा बढ़ाए। इस पूरे आपराधिक नेटवर्क के पीछे काम करने वाले असली संरक्षकों की पहचान कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए ताकि प्रदेश के किसानों के साथ हो रहे धोखे को पूरी तरह रोका जा सके।
अस्वीकरण:
यह रिपोर्ट बीकानेर में आयोजित प्रेस वार्ता में जन प्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं प्रत्यक्षदर्शी सूत्रों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच एवं कानूनी प्रक्रियाओं का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक व न्यायिक बोर्ड के अधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।