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बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल के वैश्विक संकट की आहट

मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के चलते कच्चे तेल के वैश्विक संकट का खतरा अचानक बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने लगी हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति ठप होने की आशंका पैदा हो गई है। कच्चे तेल के वैश्विक संकट के इस दौर में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई की कीमतें काफी ऊपर चली गई हैं।[1]

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार यह नई सैन्य और आर्थिक उठापटक अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए अतिरिक्त हवाई हमलों के बाद शुरू हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि यदि ईरान तुरंत शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है तो उस पर और अधिक घातक हमले किए जाएंगे। इस बयानबाजी के बाद दोनों पक्षों के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ गया है जो इस साल अप्रैल की शुरुआत में हुए बेहद नाजुक युद्धविराम के बाद से सबसे बड़ी अशांति माना जा रहा है। इसी के चलते एक बार फिर कच्चे तेल के वैश्विक संकट का खतरा बढ़ गया है। 

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का बड़ा असर

ईरान के शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने एक सख्त बयान जारी कर होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले सभी तरह के व्यापार को पूरी तरह रोक दिया है। सैन्य आदेश के अनुसार इस जलमार्ग से किसी भी तेल टैंकर या वाणिज्यिक जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरानी सेना ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि कोई भी जहाज इस प्रतिबंधित जलमार्ग से गुजरने का प्रयास करेगा तो उस पर सीधा सैन्य हमला किया जाएगा। ईरान की इस बेहद आक्रामक नाकेबंदी ने पूरी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

"यह स्थिति एक बार फिर स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच कोई भी शांति समझौता अभी बहुत दूर है और फारस की खाड़ी से होने वाला ऊर्जा प्रवाह पूरी तरह से बाधित रहने वाला है।" - आईएनजी बैंक के विश्लेषक

अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर

अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर देर शाम हवाई हमले शुरू किए जो कच्चे तेल के वैश्विक संकट को बढ़ाने का मुख्य कारण बने। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए की गई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरान के नेताओं ने तुरंत नया समझौता स्वीकार नहीं किया तो अमेरिकी सेना वहां भयानक बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगी।

"हमले कुछ समय के लिए रुक सकते हैं लेकिन अगर ईरान के नेताओं ने हमारे साथ तुरंत समझौता नहीं किया तो मैं उन पर इतनी भीषण बमबारी करूंगा कि उनका सब कुछ तबाह हो जाएगा।" - डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति

घटता स्टॉक और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक बीते सप्ताह अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में बयालीस लाख बैरल की अनुमानित गिरावट के मुकाबले बहत्तर लाख बैरल की भारी कमी दर्ज की गई है। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिकी रणनीतिक भंडार से उन्यासी मिलियन बैरल तेल बाजार में खपाया जा चुका है ताकि दुनिया में तेल की कमी को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही ओपेक देशों का तेल उत्पादन भी पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है जिसके चलते कच्चे तेल के वैश्विक संकट की स्थिति लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है जो अब पूरी तरह बंद हो चुका है। यदि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहा तो दुनिया भर के देशों को गंभीर आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि खाड़ी के अन्य उत्पादक भी अपने जहाज भेजने में असमर्थ हैं।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कूटनीतिक बदलावों से जुड़े घटनाक्रमों की सटीक जानकारी के लिए सरकारी बयानों को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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