पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले भारतीय शेयर बाजार का हाल काफी संवेदनशील और सतर्कता से भरा नजर आ रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
मुंबई, महाराष्ट्र। भारतीय शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार में आज निवेशकों के बीच भारी सतर्कता और असमंजस के चलते भारतीय शेयर बाजार का हाल बेहाल है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते सैन्य गतिरोध और आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों को डरा दिया है। इसके चलते घरेलू इक्विटी सूचकांकों में सुबह के सत्र के दौरान शुरुआती गिरावट देखी गई। हालांकि बाद के सत्र में बाजार ने रिकवरी करने की कोशिश की लेकिन वैश्विक बिकवाली का दबाव हावी रहा।[1]
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिकवाली के भारी दबाव के कारण घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं तब तक भारतीय शेयर बाजार का हाल इसी तरह उतार-चढ़ाव भरा और अस्थिर बना रहने की पूरी आशंका है।
वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड के इकतालीस सौ डॉलर के नीचे खिसकने और डॉलर इंडेक्स की मजबूती के कारण घरेलू बाजार में सोने और चांदी पर भारी दबाव है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना लगभग एक दशमलव पांच एक प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ एक लाख सैंतालीस हजार तीन सौ चौंसठ रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया है। इस गिरावट ने आभूषण निर्माताओं को चौंका दिया है।
चांदी के वायदा भाव में सोने से भी अधिक कमजोरी देखी जा रही है। चांदी आज लगभग पंद्रह सौ बयालीस रुपये गिरकर दो लाख तैंतीस हजार नौ सौ त्रेसठ रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। विश्लेषकों के अनुसार यदि चांदी दो लाख तीस हजार पांच सौ का स्तर तोड़ती है तो यह और नीचे जा सकती है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल को निचली कीमतों पर मजबूत सपोर्ट मिला है।
"आज के लिए सोने का प्रमुख सपोर्ट स्तर एक लाख छियालीस हजार पांच सौ रुपये और रेजिस्टेंस एक लाख पचास हजार एक सौ चालीस रुपये से एक लाख पपन हजार रुपये के दायरे में देखा जा रहा है।" - मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज बाजार विश्लेषक
भारतीय मुख्य सूचकांकों ने आज सुबह के शुरुआती घाटे को काफी हद तक रिकवर करने में सफलता हासिल की है। इसके बावजूद बड़े वैश्विक ट्रिगर्स से पहले बाजार पूरी तरह से साइडवेज मोड में कारोबार कर रहा है। निफ्टी पचास सूचकांक मामूली ग्यारह अंकों की गिरावट के साथ तेईस हजार दो सौ तीन दशमलव दो शून्य के आसपास बना हुआ है। तकनीकी रूप से जब तक निफ्टी तेईस हजार दो सौ के ऊपर टिका है तब तक बड़ी मंदी की संभावना कम है। कुल मिलाकर वैश्विक संकट के इस दौर में भारतीय शेयर बाजार का हाल बेहाल है।
सेंसेक्स भी करीब इकतीस अंकों की मामूली गिरावट के साथ तिहत्तर हजार नौ सौ बावन दशमलव शून्य छह के स्तर पर फ्लैट कारोबार करता दिखा। बाजार को तिहत्तर हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर निकलने के लिए मजबूत वॉल्यूम की जरूरत है। खुद बीएसई लिमिटेड का शेयर एक्सचेंज पर मामूली बढ़त के साथ उनतालीस सौ छत्तीसगढ़ दशमलव छह शून्य पर बना हुआ है लेकिन शॉर्ट-टर्म चार्ट्स पर यह भी अभी कंसोलिडेशन जोन में ही फंसा हुआ है।
"आज के इंट्राडे ट्रेडिंग में आईटीसी और एचडीएफसी बैंक जैसे हैवीवेट्स शेयर बाजार को नीचे से सहारा दे रहे हैं जिसके कारण निफ्टी निचले स्तरों पर टिकने में कामयाब रहा है।" - आईसीआईसीआई डायरेक्ट (ICICI Direct) रिपोर्ट
आज शाम छह बजे जारी होने वाले अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर दुनिया भर के बाजारों की सबसे बड़ी नजर टिकी हुई है। अगर यह डेटा उम्मीद से ज्यादा आता है तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर होंगी जिससे डॉलर इंडेक्स और मजबूत हो जाएगा। डॉलर के मजबूत होने से कमोडिटी बाजार में सोने पर और इक्विटी मार्केट में शेयरों पर बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा ईरान और इजरायल के बीच चल रही वार्ताओं और पश्चिम एशिया के अन्य घटनाक्रमों के कारण भी निवेशक कोई बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में आज ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली देखी गई है जो बाजार की कमजोरी को दर्शाती है। सुरक्षात्मक रुख अपनाते हुए निवेशक बड़े शेयरों में पैसा लगा रहे हैं जिससे भारतीय शेयर बाजार का हाल आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति से तय होगा।
अस्वीकरण
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट के दैनिक उतार-चढ़ाव की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक एक्सचेंज वेबसाइटों को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।