राजस्थान

संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार, किरण को किया डिस्चार्ज

गंभीर किडनी इंफेक्शन के प्रकोप के बाद संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार अब चिकित्सा जगत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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किरण को किया डिस्चार्ज

कोटा, राजस्थान। मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में प्रसूता और गर्भवती महिलाओं में फैले अचानक किडनी इंफेक्शन के मामले सामने आने के बाद मई महीने में पूरे चिकित्सा महकमे में काफी हड़कंप मच गया था। इस गंभीर लापरवाही की घटना के बाद दोषी डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ निलंबन समेत कई कड़े प्रशासनिक कदम उठाए गए थे। अब इस पूरे संवेदनशील मामले में एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है कि एक और गंभीर महिला मरीज को पूरी तरह ठीक करके सफलतापूर्वक अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है जिससे संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है।[1]

ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लंबे समय से भर्ती गंभीर मरीज किरण जाटव की हालत में अब काफी गुणात्मक सुधार दर्ज किया गया है। ज्ञात हो कि किरण को सिजेरियन डिलीवरी के बाद चिंतित परिजनों द्वारा आनन-फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां स्थिति बिगड़ने पर अठारह मई को उन्हें वापस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के विशेष वार्ड में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ के कारण वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा था और उनके हृदय की कार्यक्षमता भी खतरनाक रूप से कम हो गई थी।

"अस्पताल के उपचार के दौरान पीड़ित महिला किरण के स्वास्थ्य में लगातार सकारात्मक सुधार देखा गया है। अब उनका यूरिन आउटपुट पूरी तरह सामान्य हो चुका है और भूख में भी अच्छा सुधार हुआ है। महिला का हार्ट अब बिल्कुल नॉर्मल काम कर रहा है और उनकी ब्लड प्रेशर रिपोर्ट भी पूरी तरह नियंत्रित है। हमारी पूरी मेडिकल टीम डिस्चार्ज हुए मरीजों से टेलीफोन के जरिए लगातार नियमित संपर्क बनाए हुए है।" - डॉ. नीलेश जैन (प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज)

जांच रिपोर्ट सामान्य

रिपोर्ट में बताया गया है कि, प्राचार्य के अनुसार चिकित्सा टीम की कड़ी निगरानी के बाद अब किरण जाटव का रोजाना यूरिन आउटपुट दो लीटर तक पहुंच गया है जो कि पूरी तरह स्वस्थ होने का प्रमाण है। ब्लड प्रेशर और अन्य सभी आवश्यक जांच रिपोर्ट पूरी तरह से नॉर्मल आने के बाद ही उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल से ससम्मान डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया है। इससे पहले इसी वार्ड में भर्ती एक अन्य गंभीर प्रसूता चन्द्रकला को भी बारह मई को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया जा चुका है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक और समर्पित नर्सिंग स्टाफ डिस्चार्ज हो चुके इन सभी मरीजों से लगातार संपर्क में हैं ताकि घर पर भी संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार निरंतर बना रहे। अस्पताल प्रशासन इस बात की पूरी कोशिश कर रहा है कि ठीक होकर घर जा चुके मरीजों को किसी भी प्रकार की अन्य शारीरिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। डॉक्टरों की यह विशेष टीम मरीजों को खान-पान और दवाइयों के सख्त नियमों का पालन करने की हिदायत दे रही है। इस बीच संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार की यह खबर उम्मीद की नई किरण बन कर आई है। 

संक्रमण का असर

मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल की गायनेकोलॉजी विभाग में भर्ती कई महिलाएं इस खतरनाक किडनी इंफेक्शन से बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। कुछ मरीजों को पूर्व में यहां से डिस्चार्ज होने के बाद उनके परिजन निजी अस्पतालों में ले गए थे, जिनमें से दो गंभीर महिलाओं को बाद में वापस हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज में दोबारा भर्ती करना पड़ा था। इस पूरे रहस्यमयी प्रकरण में चिकित्सा जांच के तहत कुल बारह स्थानीय महिलाओं को मुख्य रूप से इस खतरनाक बैक्टीरिया से संक्रमित माना गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रभावित मरीजों में से दुर्भाग्यवश चार प्रसूता और एक गर्भवती महिला सहित कुल पांच लोगों की इलाज के दौरान पहले ही मौत हो चुकी है। अब तक दो गंभीर रूप से पीड़ित महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुकी हैं, जबकि बाकी बची पांच अन्य महिलाओं का इलाज अभी भी विशेषज्ञों की देखरेख में आईसीयू वार्ड में चल रहा है। चिकित्सा प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि जल्द ही बाकी बची महिलाओं की रिपोर्ट भी सामान्य आ जाएगी और संक्रमित प्रसूताओं के स्वास्थ्य में सुधार पूरी तरह से सुनिश्चित हो जाएगा।

अस्वीकरण:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। किडनी इंफेक्शन के कारणों, डिस्चार्ज नीति और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कानूनी अपडेट के लिए मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक गाइडलाइन को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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