हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास मालवाहक जहाजों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान की तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्ग से रवाना हो रहे मालवाहक जहाजों पर एक भीषण सैन्य संकट मंडरा रहा है। इस संवेदनशील इलाके में भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर ड्रोन हमला होने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद जहां एक तरफ तीन बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक मंच पर अमेरिका-ईरान की तू-तू मैं-मैं बेहद आक्रामक रूप ले चुकी है।[1]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कथित सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से अनुचित और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताया है। इस सप्ताह ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल वाले कुल तीन मालवाहक जहाजों को निशाना बनाकर यह हिंसक हमला किया गया था, जिसमें बुधवार को ड्यूटी पर तैनात तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत भी दर्ज की गई थी।
"हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहे भारतीय जहाजों के खिलाफ पिछली रात किया गया उनका यह ड्रोन हमला पूरी तरह से कायराना हरकत है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।" - डोनाल्ड ट्रंप (राष्ट्रपति, संयुक्त राज्य अमेरिका)
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा करते हुए सीधे तौर पर ईरान को इस कायराना हरकत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस तीखे बयान के बाद खाड़ी देशों में अमेरिका-ईरान की तू-तू मैं-मैं ने पुराना राजनयिक गतिरोध एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।
दूसरी तरफ तेहरान ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए इन सभी संगीन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ करते हुए इन दावों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। ईरान का कहना है कि इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है और यह उनके खिलाफ एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
ओमान के समुद्र तट के पास व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के कारण पूरे एशिया और यूरोप के बीच होने वाले तेल परिवहन पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला होने की इस दर्दनाक घटना ने दुनिया भर के नाविक संगठनों को भी बेहद डरा दिया है, जिसके कारण समुद्री सुरक्षा गश्त बढ़ाने की मांग अब बहुत तेजी से जोर पकड़ने लगी है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशील समुद्री गलियारे में तनाव बढ़ने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस नए वाकयुद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बिरादरी बेहद सतर्क हो गई है और अमेरिका-ईरान की तू-तू मैं-मैं के कारण सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियां अब इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध टाला जा सके।
इस भीषण संकट के समय भारत सरकार भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है और प्रभावित क्षेत्र में अपने नौसैनिक जहाजों की तैनाती की समीक्षा कर रही है। वैश्विक विश्लेषकों के अनुसार, इस विवाद को केवल आपसी बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है ताकि आने वाले दिनों में भारतीय जहाजों पर हमला जैसी घातक और अप्रत्याशित घटनाएं पूरी तरह से रोकी जा सकें और समुद्री व्यापार सुरक्षित रह सके।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठन भी इस गंभीर स्थिति को शांत करने के लिए दोनों पक्षों से कूटनीतिक संयम बरतने की लगातार अपील कर रहे हैं। अंत में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका-ईरान की तू-तू मैं-मैं किस करवट बैठती है और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर क्या ठोस और कड़े वैश्विक कदम उठाए जाते हैं ताकि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
अस्वीकरण:
यह रिपोर्ट विश्वस्त अंतरराष्ट्रीय समाचारों एवं प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। ओमान तट के पास हुए हमलों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट, सुरक्षा संबंधी निर्णयों और दोनों देशों के आधिकारिक बयानों की प्रामाणिक पुष्टि के लिए संबंधित देशों के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।