राजस्थान

आरजीएचएस में करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

सरकारी योजनाओं के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान में एसओजी ने आरजीएचएस में करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

जयपुर, राजस्थान। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने प्रदेशभर में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का बजट हड़पने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जांच एजेंसी ने आरजीएचएस में करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए तीन नए शातिर आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए इन आरोपियों को शनिवार को ही सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें आगामी सोलह जून तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।[1]

प्रशासनिक टीम अब इन आरोपियों से फर्जी ओपीडी पर्ची बनाने, योजना के असली लाभार्थियों के कार्ड का विवरण अनधिकृत रूप से जुटाने और सांठगांठ वाले चिकित्सकों तक पर्चियां पहुंचाने के नेटवर्क के बारे में कड़ी पूछताछ कर रही है। इसके अलावा आरजीएचएस पोर्टल पर फर्जी जांच रिपोर्ट अपलोड करने, अवैध भुगतानों के विवरण और इस रैकेट में शामिल अन्य फरार आरोपियों के ठिकानों के संबंध में गहन अनुसंधान किया जा रहा है।

करोड़ों का वित्तीय नुकसान

एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने इस पूरे नेक्सस का खुलासा करते हुए बताया कि कुछ अस्पताल संचालकों, डॉक्टरों और लैब ऑपरेटरों द्वारा इस योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था। ये लोग मरीजों की फर्जी ओपीडी पर्चे तैयार करते थे और बिना किसी बीमारी के अनावश्यक जांचें लिखकर बड़े-चढ़े बिल पेश कर रहे थे। इन फर्जी मेडिकल बिलों के माध्यम से आरोपियों द्वारा सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की भारी हानि पहुँचने की बात सामने आई है।

सीकर जिले में सामने आए ऐसे ही एक प्रकरण में एसओजी की टीम ने विस्तृत वैज्ञानिक अनुसंधान करने के बाद इस खेल में सीधे तौर पर लिप्त तीन मुख्य लैब कार्मिकों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए ये तीनों कर्मचारी लंबे समय से बड़े डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटर के मालिकों के सीधे निर्देश पर काम कर रहे थे और इस करोड़ों के फर्जीवाड़े को धरातल पर क्रियान्वित कर रहे थे।

अस्पताल और लैब का खेल

एडीजी विशाल बंसल ने घोटाले के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताया कि सीकर के डॉ विजय एंड बी लाल डायग्नोस्टिक सेंटर के मुख्य संचालक डॉ विजय मूंड की ओर से इस पूरे गोरखधंधे को संचालित किया जा रहा था। उन्होंने सीकर के ही एसके हॉस्पिटल में पदस्थ सरकारी डॉक्टर कमल कुमार अग्रवाल उर्फ केके अग्रवाल, डॉ गजराज सिंह, डॉ सुनील ढाका, डॉ राकेश चौधरी और डॉ मुकेश वर्मा के साथ गहरी आपराधिक मिलीभगत कर रखी थी।

आरोप है कि इन डॉक्टरों ने अस्पताल में बिना किसी मरीज को देखे अथवा केवल कागजों पर फर्जी परामर्श पर्चियां बनाईं और उनमें अनावश्यक महंगी जांचें लिख दीं। इसके बाद लैब में उनकी मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार कर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती थी। इस फर्जी खेल के जरिए राज्य सरकार से करोड़ों रुपए का अवैध भुगतान उठा लिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस थाना एसओजी पर मुकदमा संख्या 11/26 दर्ज कराया है।

लैब कार्मिकों की लिप्तता

इस पूरे मामले की कमान संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र दादरवाल ने अनुसंधान में पाया कि आरोपी लैब संचालक बनवारी लाल उर्फ बी लाल और डॉ कमल कुमार उर्फ केके अग्रवाल के विरुद्ध अपराध प्रमाणित होने पर चार मई को ही गिरफ्तार किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार लैब कर्मचारी अपने मालिकों के निर्देश पर लाभार्थियों से उनके आरजीएचएस कार्ड नंबर लेकर एसके हॉस्पिटल से फर्जी परामर्श पर्ची बनवाते थे।

लैब संचालक की पहले से तैयार पर्चियों में दर्ज जांचों को वे अस्पताल के डॉक्टरों से लिखवाकर वापस डॉ विजय मूंड को सौंप देते थे। वह इन पर आधारित फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर योजना के तहत प्राप्त भुगतानों से मोटा अवैध आर्थिक लाभ कमाता था। इस गिरोह ने मिलकर जनता के हक पर डाका डाला, जिसके बाद विभाग ने आरजीएचएस में करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए सीकर निवासी बजरंग, अरविन्द कुमार शिला और विक्रम कल्याण को गिरफ्तार किया है।

आम जनता से अपील 

एसओजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने स्वास्थ्य कार्ड और गोपनीय पहचान पत्रों का विवरण किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा न करें। एजेंसी ने साफ किया है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य रसूखदार चेहरों को भी जल्द ही बेनकाब किया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं में पूरी पारदर्शिता और शुचिता बनी रहे।

करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने सरकारी फंड के इस बड़े दुरुपयोग और आरोपियों के खिलाफ विधिक एक्शन को स्पष्ट करते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा है:

"कुछ अस्पताल संचालकों, डॉक्टरों और लैब ऑपरेटरों के योजना का दुरुपयोग कर फर्जी ओपीडी पर्चे, अनावश्यक और फर्जी जांचें और बड़े-चढ़े बिल पेश कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की हानि पहुंचाने के मामले सामने आए। सीकर जिले में सामने आए ऐसे एक प्रकरण में एसओजी ने विस्तृत अनुसंधान के बाद लैब कार्मिक बजरंग सिंह, अरविंद कुमार और विक्रम को गिरफ्तार किया।"

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस इन आरोपियों के बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों को भी खंगाल रही है, ताकि अवैध रूप से कमाए गए धन की रिकवरी की जा सके। इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रदेश के चिकित्सा महकमे और निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स के संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है। सरकार ने साफ किया है कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आरजीएचएस में करोड़ों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने का यह प्रशासनिक अभियान भविष्य में भी पूरी कड़ाई से जारी रहेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण राजस्थान एसओजी द्वारा आरजीएचएस योजना में किए गए मेडिकल घोटाले की जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और आधिकारिक पुलिस रिमांड के तथ्यों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Source Source
#RajasthanSOG #RGHSScamJaipur #MedicalFraudCase #SOGRaidsSeekar #HealthSchemeScam #CrimeNewsRajasthan
Read Full Article on RexTV India