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दुर्गम पहाड़ियों पर सेना का आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी

जम्मू कश्मीर के राजोरी जिले के बेहद दुर्गम और घने वन क्षेत्रों में सुरक्षाबलों द्वारा आतंकवादियों के सफाए के लिए आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी है।

By अजय त्यागी 1 min read
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आतंकवाद विरोधी महाअभियान - File Photo

राजोरी, जम्मू कश्मीर। राजोरी के दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों में आतंकवाद के खिलाफ सेना का महाअभियान जारी है। खड़ी चढ़ाई, गहरी खाइयों और रास्ता रोकने वाली झाड़ियों की बाधाओं को चीरते हुए सुरक्षाबल दिन-रात आतंकियों की तलाश में जुटे हैं। सोमवार यानी आज 24वें दिन में प्रवेश कर चुका ऑपरेशन शेरूवाली अब राजोरी के गंभीर मुगला और डोरिमल क्षेत्र में सबसे लंबा और चुनौतीपूर्ण आतंकवाद-रोधी अभियान बन गया है। रविवार को भी सुरक्षाबल आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी रखते हुए लगातार आतंकियों की तलाश करते रहे।[1]

ऑपरेशन शेरूवाली 23 मई 2026 को शुरू हुआ था। रक्षा सूत्रों के अनुसार, आतंकियों की मौजूदगी संबंधी खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किए गए इस अभियान में जंगलों के विशाल क्षेत्र को घेरे में लेकर लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। घने जंगलों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी, अतिरिक्त निगरानी और पूरे इलाके में दबदबा बनाने के हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।

सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि

इस ऑपरेशन की तुलना वर्ष 2021 में पुंछ जिले के भाटादूड़ियां के जंगल में चले लंबे आतंकरोधी अभियान से की जा रही है जो अक्तूबर 2021 में तीन सप्ताह तक चला था। सुरक्षाबलों ने आठ किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र में अभियान चलाया था। इस बार भी सेना के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ घने जंगलों के भीतर छिपे हुए दुश्मनों की खोज में जुटे हैं।

ऑपरेशन शेरूवाली में जवान लगातार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम की चुनौतियों और संभावित सुरक्षा खतरों का सामना कर रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल बीरेश्वर गोस्वामी बलिदान हो चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने क्षेत्र में अपना दबाव बनाए रखा है और अभियान को निर्णायक परिणाम तक पहुंचाने के लिए तलाशी जारी रखी है। आतंकियों की तलाश में अतिरिक्त सुरक्षाबल लगाए गए हैं। खोजी कुत्तों और ड्रोन से भी तलाशी लेकर आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी है।

भौगोलिक चुनौतियां और मार्ग

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डोरिमल और गंभीर मुगला का क्षेत्र राजोरी, मंजाकोट, थन्नामंडी, दरहाल और इसके आगे पुंछ की ओर जाने वाले कई वन मार्गों से जुड़ा है। यदि सुरक्षा घेरा पूरी तरह प्रभावी न हो तो आतंकी घने जंगलों की आड़ में दूसरे इलाकों की ओर बच निकलने का प्रयास कर सकते हैं। आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी रखते हुए भारतीय सेना इस बात का पूरा ध्यान रख रही है।

ऐसे में सुरक्षाबलों ने बहुस्तरीय घेराबंदी, निगरानी उपकरणों और अतिरिक्त जवानों की तैनाती के जरिए ऐसे संभावित रास्तों पर विशेष नजर रखी है। इसके बावजूद आतंकियों के कहीं और भाग जाने से पूरी तरह से इन्कार नहीं किया जा सकता। सेना के उच्च अधिकारी इस पूरे सर्च ऑपरेशन की खुद निगरानी कर रहे हैं ताकि आतंकियों के भागने के सभी रास्तों को पूरी तरह सील किया जा सके।

रसद और स्थानीय नेटवर्क

सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी आतंकी समूह के लिए इतने लंबे समय तक घने जंगलों में लगातार छिपे रहना आसान नहीं होता। भोजन, दवाइयों व अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण होती है। इन आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। ये जांच भी की जा रही है कि आतंकियों को कहीं से रसद और पानी तो नहीं मिल रहा है।

अतीत में कई अभियानों में सुरक्षा एजेंसियां ओजीडब्ल्यू नेटवर्क का खुलासा कर चुकी हैं जो आतंकियों तक भोजन, सूचनाएं या अन्य मदद पहुंचाते रहे हैं। हालांकि, ऑपरेशन शेरूवाली में किसी स्थानीय सहायता नेटवर्क की भूमिका की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षाबल स्थानीय आबादी से भी संपर्क बनाए हुए हैं ताकि कोई संदिग्ध गतिविधि तुरंत सामने आ सके।

दुर्गम वन क्षेत्र

डोरिमल और गंभीर मुगला के जंगल राजोरी जिले के सबसे दुर्गम और घने वन क्षेत्रों में गिने जाते हैं। यहां घने चीड़ और मिश्रित वन के बीच संकरे पहाड़ी रास्ते हैं। अनेक प्राकृतिक गुफाएं हैं। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद सीमित रहती है। इससे सुरक्षाबलों को तलाशी अभियान चलाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और जवानों को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना होता है।

वन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। घने पेड़ों और झाड़ियों के कारण दिन में भी निगरानी चुनौतीपूर्ण रहती है। रात में कठिनाई अधिक बढ़ जाती है। लगातार पैदल गश्त, भारी हथियारों और उपकरणों के साथ दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ने और उतरने में मुश्किल तथा बदलते मौसम के बीच आतंकवाद विरोधी महाअभियान चलाना जवानों के धैर्य की परीक्षा है।

अतीत के बड़े ऑपरेशन

पीर पंजाल पर्वतमाला के सुरनकोट पुंछ में वर्ष 2003 में जनवरी से मई तक चले सबसे लंबे ऑपरेशन सर्प विनाश में करीब 100 आतंकवादी मार गिराए गए थे। 100 से अधिक बंकर, गुफाओं और आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया था। यह अभियान आज भी पीरपंजाल क्षेत्र के सबसे बड़े और कठिन आतंकरोधी अनुभवों में गिना जाता है। इस अभियान में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के ठिकानों, बंकरों और नेटवर्क को ध्वस्त किया था।

इसके अलावा 11 अक्तूबर 2021 को शुरू हुआ ऑपरेशन भाटा धुरियां पुंछ-राजोरी के डेरा की गली, भाटा धुलियां और सुरनकोट-मेंढर के घने जंगलों में चलाया गया। सेना और सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के खिलाफ तीन सप्ताह तक अभियान चलाया। अभियान के दौरान नौ जवान बलिदान हुए थे और आतंकी भाग निकले थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ आतंकवाद विरोधी महाअभियान जारी रखा गया है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। वर्तमान में राजोरी के जंगलों में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा कारणों से संवेदनशील सैन्य जानकारियों को साझा नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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