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विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव: डीजल और एटीएफ पर बढ़ी ड्यूटी

केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बेहद बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए देश से बाहर निर्यात होने वाले डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का यह नया फैसला आगामी सोलह जून से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू माना जाएगा जिससे तेल निर्यातकों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ने वाला है।[1]

सरकार के इस कदम के बाद देश के भीतर आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव करके सरकार ने राजस्व और घरेलू बाजार को संतुलित करने का प्रयास किया है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू खपत के लिए जारी होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश के भीतर आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इस नए फैसले का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

टैक्स की नई दरें

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई दरों के तहत डीजल के निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव) को साढ़े तेरह रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब सीधे चौदह रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को साढ़े नौ रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे साढ़े बारह रुपये प्रति लीटर करने का बड़ा फैसला लिया गया है। इस संशोधन के बाद विदेशी बाजारों में ईंधन बेचना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा।

दूसरी तरफ सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में इस पाक्षिक समीक्षा के दौरान कोई भी फेरबदल नहीं किया है और इसे पूर्व की तरह डेढ़ रुपये प्रति लीटर पर ही बरकरार रखा है। तेल विपणन कंपनियों को अब इस नई कर व्यवस्था के मुताबिक ही अपने निर्यात घाटे और मुनाफे का आकलन करना होगा। सरकार की यह नई कर प्रणाली देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैश्विक संकट का असर

इस अप्रत्याशित कर बढ़ोतरी के पीछे पश्चिम एशिया में लगातार गहराता जा रहा गंभीर सैन्य और राजनीतिक संकट मुख्य वजह बनकर उभरा है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद भड़की युद्ध की आग और उसके बाद हुई जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

इसी वैश्विक विभीषिका को देखते हुए सरकार ने सबसे पहले छब्बीस मार्च को डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाने का साहसिक निर्णय लिया था जिसकी हर पंद्रह दिन में समीक्षा की जाती है। इसके बाद सोलह मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी विशेष शुल्क लागू कर दिया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में आई भारी तेजी का फायदा उठाकर भारतीय निर्यातक घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में मुनाफा न कमाने लगें, इसीलिए सरकार ने समय रहते विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव करने का यह सख्त रास्ता चुना है।

रणनीतिक घरेलू नीति

सरकार का यह कदम मुख्य रूप से देश के भीतर ईंधन की कमी को रोकने और जमाखोरी पर लगाम लगाने की एक सोची-समझी रणनीतिक योजना का हिस्सा है। पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारतीय रिफाइनरियों द्वारा उत्पादित तेल को देश के भीतर ही रोके रखने के लिए निर्यात को जानबूझकर हतोत्साहित किया जा रहा है। सरकार तेल कंपनियों को यह साफ संदेश दे रही है कि वैश्विक स्तर पर कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने के बजाय वे घरेलू बाजार की जरूरतों को प्राथमिकता दें।

अगर तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के लालच में देश से बाहर अंधाधुंध निर्यात जारी रखती हैं, तो भारत के भीतर ईंधन का एक नया संकट खड़ा हो सकता है जिससे महंगाई बेकाबू हो जाएगी। इस संभावित आर्थिक खतरे को भांपते हुए ही वित्त मंत्रालय ने समय पर यह पाक्षिक समीक्षा करके शुल्कों में आवश्यक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख को देखते हुए इन कर दरों को दोबारा घटाया या बढ़ाया जा सकता है ताकि देश के भीतर ऊर्जा का संतुलन पूरी तरह से कायम रहे।

"वित्त मंत्रालय द्वारा विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किए जाने के बाद अब घरेलू रिफाइनरियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का निर्यात करना काफी खर्चीला सौदा साबित होगा और उन्हें घरेलू नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।"

निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो केंद्र सरकार का यह फैसला वैश्विक मंदी और युद्ध के बाद उपजे हालातों से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन प्रयास है। तेल कंपनियों को थोड़े समय के लिए इस कर बढ़ोतरी से नुकसान हो सकता है, लेकिन देशहित और आम नागरिकों की भलाई के लिए घरेलू बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार को आने वाले समय में भी वैश्विक कीमतों पर पैनी नजर रखनी होगी क्योंकि विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव करके ही भारत को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के थपेड़ों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह देश में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स की नई विनियामक दरों और वित्त मंत्रालय की अधिसूचना की समीक्षा से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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