अयोध्या धाम में दान पेटियों की गड़बड़ी और चढ़ावा चोरी विवाद के बीच दो वर्ष पुराना मुकुट गायब होने का मामला भी सामने आया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर की दान पेटियों में कथित गड़बड़ी और चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अब दो वर्ष पुराना एक और मामला चर्चाओं में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, सावन के झूला मेले में भगवान राम और उनके तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न को पहनाए जाने वाले सोने के मुकुट अचानक गायब हो गए थे। आभूषणों के इस तरह अचानक गायब होने से मंदिर प्रशासन और पुजारियों में हड़कंप मच गया था।[1]
परंपरा के अनुसार झूलन उत्सव के दौरान चारों भाइयों का विशेष श्रृंगार कर उन्हें सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं और झूले पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। बताया जा रहा है कि सावन मेले की तैयारियों के दौरान जब पुजारियों ने मुकुट मांगे तो वे उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई, लेकिन कई महीनों तक उनका कोई पता नहीं चल सका। इस घटना के बाद से ही मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं।
सूत्रों की मानें तो लगातार दबाव और खोजबीन के बाद ये मुकुट मंदिर परिसर में ही ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी की अलमारी से बरामद हुए थे। चर्चा यह भी रही कि ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु द्वारा अपनी मां के जेवर बेचकर बनवाए गए थे और रामलला को भेंट किए गए थे। इस भावुक पहलू के सामने आने के बाद जब मुकुट गायब हुए तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया था। यही वजह है कि वर्तमान हालातों को देखते हुए चढ़ावा चोरी विवाद अब और ज्यादा तूल पकड़ता जा रहा है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद मंदिर व्यवस्था पर सवाल उठे थे। सूत्रों के अनुसार बाद में इस प्रकरण से जुड़े एक कर्मचारी को तत्कालीन कार्रवाई के तहत हटाया भी गया था। हालांकि इस संबंध में कभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इसी वजह से यह पूरा मामला अब तक केवल एक चर्चा और रहस्य बना हुआ है, जिस पर मंदिर प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अब जबकि दानराशि और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है, ऐसे में मुकुट गायब होने का यह पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। लोग पुराने मामलों को वर्तमान गड़बड़ी से जोड़कर देख रहे हैं और प्रबंधन की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस प्राचीन धार्मिक स्थल के सुरक्षा प्रबंधों को लेकर आम भक्तों के मन में तरह-तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं, जिसके कारण चढ़ावा चोरी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
आने वाले दिनों में यदि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होती है तो पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल इस नए घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है और आंतरिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग उठ रही है ताकि चढ़ावा चोरी विवाद हमेशा के लिए शांत हो सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह अयोध्या के राम मंदिर में आभूषणों के रखरखाव से जुड़े पुराने प्रकरण और वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।