अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व युद्ध को समाप्त करने के लिए एक अंतरिम समझौता हुआ है जिसमें परमाणु हथियार पर ट्रम्प का बड़ा दावा सामने आया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
इवियन-लेस-बैंस, फ्रांस। अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा अंतरिम समझौता हुआ है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बात की पुष्टि की है कि यह नया समझौता तेहरान को भविष्य में परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोक देगा। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाद परमाणु हथियार पर ट्रम्प का बड़ा दावा मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो फीसदी से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि युद्ध के कारण प्रभावित हुए वैश्विक तेल और गैस उत्पादन को पूरी तरह से पटरी पर लौटने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है।[1]
इस ऐतिहासिक राजनयिक समझौते के तहत दोनों देशों के बीच बीते अप्रैल महीने में घोषित किए गए अस्थायी युद्धविराम को अगले साठ दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बढ़ी हुई अवधि का मुख्य उद्देश्य युद्धरत देशों को एक स्थायी शांति समझौते पर विस्तार से बातचीत करने का पर्याप्त अवसर देना है। परमाणु हथियार पर ट्रम्प का बड़ा दावा सामने आने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त कर देगा जिससे क्षेत्र में ठप पड़ी व्यापारिक गतिविधियों को दोबारा गति मिल सकेगी।
इसके बदले में तेहरान प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य समुद्री जहाजों के सुरक्षित आवागमन को पूरी तरह बहाल करने पर सहमत हुआ है। इस रणनीतिक जलमार्ग को इस साल फरवरी में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान द्वारा पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया था। राष्ट्रपति ट्रम्प ने जोर देकर कहा है कि इस शांति समझौते का पूरा पाठ आगामी कुछ दिनों में औपचारिक रूप से जनता के सामने रख दिया जाएगा। ईरान ने हमेशा से कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस समझौते के लागू होते ही ईरान को तुरंत तेल और ईंधन बेचने की अनुमति मिल जाएगी। इतना ही नहीं इस पूरी व्यापारिक प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए बैंकिंग, परिवहन और आवश्यक बीमा सेवाओं को भी तत्काल प्रभाव से बहाल किया जा रहा है। यदि ईरान भविष्य में समझौते की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करता है तो खाड़ी देशों के सहयोग से एक विशाल पुनर्निर्माण कोष भी बनाया जाएगा।
इस समझौते के बावजूद आने वाले साठ दिनों में दोनों देशों के वार्ताकारों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बेहद जटिल और पुराने विवादित मुद्दों पर फिर से गंभीर चर्चा करनी होगी। अमेरिका में इस समझौते को लेकर घरेलू स्तर पर राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है क्योंकि राष्ट्रपति ने इसके लिए संसद से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही ट्रम्प को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जो आगामी मध्यावधि चुनावों में उनके लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
दूसरी ओर इजरायल ने खुद को इस पूरे घटनाक्रम और वार्ता से पूरी तरह अलग कर लिया है जिससे इस युद्धविराम के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल भी मँडरा रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनका देश इस समझौते को मानने के लिए कतई बाध्य नहीं है और वे दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएंगे। परमाणु हथियार पर ट्रम्प का बड़ा दावा सामने आने के बाद ईरान के सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके तो इजरायल को इसका बेहद कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थितियां बदल सकती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।