बदलते सुरक्षा माहौल और आम लोगों की सुविधा के लिए सैन्य सीमा सुरक्षा में बदलाव का एक बड़ा फैसला लिया गया है जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में पाबंदियां कम होंगी।
Military guard posts of North Korea, rear, and South Korea, front, are seen in Paju - File Photo
सियोल, दक्षिण कोरिया। बदलते सुरक्षा परिदृश्य और उत्तर कोरियाई सीमा पर रहने वाले स्थानीय निवासियों की भारी असुविधा को देखते हुए दक्षिण कोरिया सरकार द्वारा सैन्य सीमा सुरक्षा में बदलाव का एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने इस नए नीतिगत कदम के तहत नागरिक पहुंच को प्रतिबंधित करने वाले संवेदनशील दायरे को काफी छोटा करने की घोषणा की है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच चलने वाले पुराने तनावपूर्ण माहौल में आम नागरिकों को दैनिक कार्यों के लिए बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।[1]
वर्तमान समय में यह नागरिक नियंत्रण रेखा वर्ष 1950 से 1953 तक चले ऐतिहासिक कोरियाई युद्ध की समाप्ति पर तय की गई सैन्य सीमा से लगभग दस किलोमीटर दक्षिण में समानांतर चल रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे प्रतिबंधित सुरक्षा क्षेत्र के भीतर प्रवेश करने के लिए दक्षिण कोरियाई नागरिकों को सेना से विशेष लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होता है। नए रक्षा नीति सुधारों के तहत अब इस नागरिक पहुंच रेखा को सैन्य सीमा रेखा से औसतन छह किलोमीटर तक पीछे खिसका दिया जाएगा जिससे प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा काफी सिमट जाएगा।
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों से मिले आंकड़ों के अनुसार इस बेहद संवेदनशील और प्रतिबंधित घोषित किए गए सुरक्षा क्षेत्र के भीतर लगभग बीस हजार स्थानीय लोग निवास करते हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इन स्थायी निवासियों के अलावा भी बड़ी संख्या में अन्य बाहरी लोग खेती-किसानी और मजदूरी के सिलसिले में कड़ी सैन्य अनुमति प्रक्रियाओं से गुजरते हुए इस क्षेत्र में रोजाना प्रवेश करते हैं। ऐसे में दक्षिण कोरिया द्वारा सैन्य सीमा सुरक्षा में बदलाव किए जाने से इन हजारों मेहनतकश लोगों को अपनी आजीविका चलाने के लिए बार-बार होने वाली जटिल जांच प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल जाएगी।
इसके अतिरिक्त दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों के नजदीक लागू कई अन्य पुरानी पाबंदियों को भी पूरी तरह से आसान बनाने की कई बड़ी घोषणाएं की हैं। इन महत्वपूर्ण बदलावों के अंतर्गत अब कृषि संबंधी कार्यों के लिए ड्रोन उड़ाने के दिशा-निर्देशों में ढील दी गई है जिससे स्थानीय किसान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल आसानी से कर सकेंगे। दक्षिण कोरिया में पिछले वर्ष सत्ता संभालने वाली राष्ट्रपति ली जे म्युंग की उदारवादी सरकार ने उत्तर कोरिया के साथ लगातार जारी गंभीर तनाव को कम करने के उद्देश्य से पूर्व में भी सिलसिलेवार ढंग से कई बड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं।
इस बड़े नीतिगत फैसले को धरातल पर उतारने के पीछे दक्षिण कोरियाई सेना की उन्नत तकनीकी तैयारी और सीमा पर जवानों की बढ़ी हुई सतर्कता को सबसे मुख्य वजह माना जा रहा है। सैन्य सीमा सुरक्षा में बदलाव का यह फैसला सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार की जा रही मांग और अपीलों के बाद ही संभव हो सका है। हालांकि दक्षिण कोरिया के इन तमाम शांतिपूर्ण और उदारवादी प्रयासों के बावजूद उत्तर कोरिया यानी प्योंगयांग का रुख अब भी अपने इस सीमावर्ती देश के प्रति काफी आक्रामक और शत्रुतापूर्ण बना हुआ है।
नागरिकों की सुरक्षा से समझौता किए बिना देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए दक्षिण कोरिया द्वारा अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों को तैनात किया गया है जिससे मानव हस्तक्षेप की जरूरत कम हुई है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल मिलकर नए सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में सैन्य सीमा सुरक्षा में बदलाव के इस अभूर्व निर्णय का जमीनी असर आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय विकास के रूप में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
"यह परिवर्तन बदलते सुरक्षा माहौल के बीच स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए किया गया है जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कई वर्षों के अनुरोधों का परिणाम है। हमारी बेहतर रक्षा तैयारियों के कारण ही इस निर्णय को लागू करना संभव हो पाया है।" - आह्न ग्यू-बैक, रक्षा मंत्री, दक्षिण कोरिया
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा नीतियां और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थितियां अत्यधिक संवेदनशील एवं परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।