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क्या बहाल होगी सेवा? भारत में टेलीग्राम बैन मामला पहुंचा अदालत में

देश भर में चर्चा का विषय बना टेलीग्राम बैन मामला अब अदालत की चौखट तक जा पहुँचा है जिससे इंटरनेट पाबंदियों पर विवाद खड़ा हो गया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली। देश में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षा NEET की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के बीच एक नया कूटनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम ने भारतीय अदालत में एक याचिका दायर की है। कंपनी ने इस याचिका के जरिए भारत सरकार के टेलीग्राम को बैन करने के आदेश को कड़ी चुनौती दी है। जिसके चलते टेलीग्राम बैन मामला इस समय सुर्ख़ियों में आ गया है।[1]

यह लोकप्रिय मैसेजिंग एप्लिकेशन को ब्लॉक करने की सख्त प्रक्रिया बीते मंगलवार से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक यह पाबंदी आगामी बाईस जून तक पूरी तरह से लागू रहने वाली है। प्रशासन का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश से जुड़ी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों द्वारा की जाने वाली संभावित गड़बड़ियों और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए यह टेलीग्राम बैन मामला पूरी तरह से तर्कसंगत और जरूरी कदम है।

परीक्षाओं में धोखाधड़ी

इस पूरे घटनाक्रम पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा टेलीग्राम कंपनी से तत्काल प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया था लेकिन उनकी तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दरअसल पिछले महीने ही भारत सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्नातक प्रवेश परीक्षा नीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया था। अधिकारियों ने बताया था कि उन्हें परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की गंभीर शिकायतें और इनपुट्स मिले थे जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।

इस बड़ी धांधली के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने पाया कि पेपर लीक माफिया और परीक्षार्थी संवेदनशील जानकारियों को साझा करने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहे थे। जिनमे टेलीग्राम का नाम प्रमुखता ए सामने आया। इसी सुरक्षा चूक को दुरुस्त करने के लिए सरकार को कड़ा रुख अपनाना पड़ा जिसके परिणाम स्वरूप उपजा यह टेलीग्राम बैन मामला अब कानूनी रूप ले चुका है। हालांकि कंपनी का तर्क है कि इस तरह के व्यापक प्रतिबंध से उन लाखों सामान्य उपयोगकर्ताओं को भारी असुविधा हो रही है जो अपनी दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस पर निर्भर हैं।

न्यायालय में सुनवाई

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अदालत का जो भी रुख रहेगा उसका असर आने वाले समय में इंटरनेट और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े नियमों पर भी पड़ेगा। सरकार अपनी दलील में राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था की साख और लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य का हवाला दे रही है जिसके लिए इस कदम को वह पूरी तरह से सही मानती है। दूसरी तरफ तकनीकी कंपनियां इस तरह के अचानक लगाए जाने वाले ब्लॉक ऑर्डर्स को अपने व्यापारिक अधिकारों का हनन मान रही हैं।

आगामी कुछ दिनों में इस याचिका पर होने वाली अदालती बहस के दौरान दोनों पक्षों की तरफ से कई महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज पेश किए जाने की संभावना है। देश भर के करोड़ों छात्र और अभिभावक भी इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी परीक्षाओं और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। बहरहाल, टेलीग्राम बैन मामला के इस कानूनी विवाद का अंतिम निपटारा अब पूरी तरह से न्यायालय के विवेक और उसके द्वारा आने वाले दिनों में दिए जाने वाले फैसले पर ही निर्भर करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सरकारी नीतियां, अदालती आदेश और तकनीकी प्रतिबंधों की स्थितियां कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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