बाज़ार और निवेश

भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सोने की कीमतों में स्थिरता से असमंजस

वैश्विक बाजारों में फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और अमेरिकी समझौतों के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता का दौर देखा जा रहा है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार में इन दिनों बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच एक ठहराव देखने को मिल रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को वैश्विक बाजार में सोने के भाव एक सप्ताह के उच्च स्तर के करीब स्थिर रहे। यह स्थिरता ऐसे समय पर देखी जा रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते के नए विवरण सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर तमाम बड़े और छोटे निवेशक फेडरल रिजर्व के नवनियुक्त अध्यक्ष केविन वॉर्श की पहली नीतिगत बैठक के निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।[1]

इस महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम के बीच हाजिर सोना वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव या स्थिरता के साथ 4328.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले सोमवार को व्यापारिक सत्र के दौरान यह धातु 4370.82 डॉलर के एक सप्ताह के उच्चतम स्तर को छू चुकी थी। दूसरी ओर अमेरिकी सोना वायदा भी अगस्त डिलीवरी के लिए 0.1% की मामूली कमजोरी के साथ 4348.20 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रहा था, जिससे बाजार में सोने की कीमतों में स्थिरता की पुष्टि होती है।

वैश्विक नीतिगत बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में ईरान के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते को लेकर एक बड़ा बयान साझा किया है। राष्ट्रपति के अनुसार इस नए समझौते के लागू होने से तेहरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने की किसी भी संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया जाएगा। वहीं एक अन्य वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते के तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी, जिससे तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल के दाम तीन महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं।

इस जटिल आर्थिक परिदृश्य पर टेस्टीलाइव के ग्लोबल मैक्रो प्रमुख इल्या स्पिवक ने बाजार की स्थिति और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा को लेकर अपनी पैनी राय रखी है। वैश्विक स्तर पर बदल रहे समीकरणों और नीतिगत दरों में अनिश्चितता के कारण पैदा हुए माहौल के चलते निवेशक भी इस समय अपनी नई पोजीशन बनाने को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसी वजह से सराफा बाजार में बड़े खरीदार किसी भी आक्रामक फैसले से बच रहे हैं, जो सीधे तौर पर व्यापारिक गति को प्रभावित कर रहा है।

"फेड की मौद्रिक नीति घोषणा पर सभी की निगाहें टिकी होने के कारण सोने की हालिया तेजी की रफ्तार अब थोड़ी धीमी हो रही है। व्यापारी अभी भी इस बात को लेकर पूरी तरह अनिश्चित हैं कि नए अध्यक्ष अपने आक्रामक रिकॉर्ड, बढ़ती मुद्रास्फीति और व्हाइट हाउस के नरम रुख के दबाव के बीच कैसे संतुलन बनाएंगे। -इल्या स्पिवक, ग्लोबल मैक्रो प्रमुख, टेस्टीलाइव"

फेडरल रिजर्व के अधिकांश नीति निर्माताओं का मानना है कि उन्हें मुद्रास्फीति को रोकने के लिए अल्पकालिक उधारी लागत को पूरे वर्ष स्थिर रखना होगा। आज जारी होने वाले नए अनुमानों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कुछ गिने-चुने सदस्य अर्थव्यवस्था में महंगाई को स्थायी रूप से पैर पसारने से रोकने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प भी चुन सकते हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के मुताबिक, आगामी दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना अब घटकर 59% रह गई है, जो पिछले हफ्ते तक लगभग 70% के स्तर पर टिकी हुई थी।

भारतीय बाजार पर असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस उठापटक का सीधा असर भारतीय घरेलू सराफा बाजार के सेंटीमेंट्स और खुदरा व्यापार पर भी देखने को मिल रहा है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में स्थिरता के चलते भारत के प्रमुख महानगरों में भी सोने और चांदी के भाव एक निश्चित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। हालांकि भारत के मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के स्थानीय बाजारों के आज के बिल्कुल सटीक और अंतिम बंद भाव की विस्तृत जानकारी आधिकारिक तौर पर इंटरनेट पर पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी है लेकिन सोने की कीमतों में स्थिरता ही सामने आ रही है।

लंबे समय के निवेश को लेकर वेस्टपैक के विश्लेषकों ने इस कीमती धातु के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक शोध पत्र जारी किया है। वेस्टपैक के विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीतिक और नीतिगत जोखिमों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही निरंतर खरीदारी सोने को सहारा देगी। इसके साथ ही एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन में आभूषणों की लगातार बनी रहने वाली मजबूत मांग के कारण आने वाले समय में बहुमूल्य धातुओं को दीर्घकालिक ढांचागत समर्थन मिलना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। फिलहाल, सोने की कीमतों में स्थिरता का दौर कब तक जारी रहता है यह देखने वाली बात है। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार की दरें, फेडरल रिजर्व की नीतियां और वैश्विक समझौते कानूनी एवं आर्थिक प्रक्रियाओं के अधीन परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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