राजस्थान

ट्रैफिक पुलिस पर आरोप: चालान के चक्कर में गई बुजुर्ग की जान

टोंक में ट्रैफिक पुलिस पर आरोप है कि चालान की कार्रवाई में रोक कर रखने की वजह से समय पर इलाज नहीं मिला, अंततः बुजुर्ग की मौत हो गई।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

टोंक, राजस्थान। राजस्थान के टोंक जिले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मृत्यु को लेकर एक बेहद गंभीर और संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के पीड़ित बेटे ने चालान की रसीद साझा करते हुए ट्रैफिक पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि ट्रैफिक पुलिस ने आपात स्थिति बताने के बावजूद उनकी गाड़ी को बेवजह रोक कर रखा। परिजनों का दावा है कि चालान काटने की कागजी प्रक्रिया में पुलिसकर्मियों द्वारा की गई अत्यधिक देरी के कारण उनके बीमार पिता को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। जिसके कारण उनकी मौत हो गई।[1] 

इस दुखद घटना के सामने आने के बाद से पूरे टोंक क्षेत्र के आम नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। हालांकि इस पूरे मामले पर ड्यूटी पर तैनात संबंधित पुलिसकर्मी ने पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।

अस्पताल के रास्ते में रुकावट

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीपलू क्षेत्र के मूल निवासी महेंद्र यादव ने ट्रैफिक पुलिस पर आरोप लगाते हुए बताया कि 14 जून को वह अपने बीमार पिता शिवजी लाल यादव के साथ टोंक शहर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक उनके पिता के सीने में बेहद तेज और असहनीय दर्द होना शुरू हो गया था। बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ती देख महेंद्र ने बिना कोई समय गंवाए अपने एक परिचित व्यक्ति की मदद ली और पिता को बाइक पर बीच में बैठाकर तत्काल टोंक के प्रसिद्ध सआदत अस्पताल के लिए रवाना हो गए।

महेंद्र का आरोप है कि जैसे ही उनकी मोटरसाइकिल छावनी चौराहे के पास स्थित पुलिस लाइन के सामने पहुंची, तभी वहां तैनात यातायात पुलिस के जवानों ने उनकी बाइक को जबरन रोक लिया और मोटरसाइकिल की चाबी निकाल ली। चूंकि मोटरसाइकिल पर उस समय तीन लोग सवार थे और उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट भी नहीं पहन रखा था, इसलिए वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने तुरंत उनके खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के तहत चालान काटने की दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।

चालान की कार्रवाई में देरी

पीड़ित महेंद्र यादव ने रोते हुए बताया कि उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों के सामने कई बार अपने वृद्ध पिता की गंभीर शारीरिक स्थिति का हवाला दिया था। उन्होंने पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़कर पहले अस्पताल जाने देने और बाद में कोई भी कानूनी कार्रवाई पूरी करने की लगातार गुहार लगाई, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने उनकी एक न सुनी। महेंद्र का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने उनकी मोटरसाइकिल की चाबी भी अपने पास रख ली जिससे वे चाहकर भी आगे नहीं बढ़ सके।

इस विवाद और कागजी कार्रवाई के दौरान बीमार बुजुर्ग की तबीयत लगातार सड़क पर ही बिगड़ती रही, जिसके कारण उन्हें बेबसी में सड़क किनारे बने एक चबूतरे पर लिटाना पड़ा। परिजनों का कहना है कि करीब 1 घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद जब उन्होंने 100 रुपये का चालान बनाकर दिया और उसे भरा गया, तब कहीं जाकर पुलिस ने उन्हें वहां से जाने दिया। इसके बाद वे दोपहर करीब 12:45 बजे सआदत अस्पताल पहुंचे, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कर लिया।

अस्पताल का आधिकारिक बयान

सआदत अस्पताल की वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉ. दिशा साहनी ने बताया कि जब मरीज को अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया था, तब उनकी स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक और चिंताजनक बनी हुई थी। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने उन्हें तत्काल जीवन रक्षक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया और आईसीयू में स्थानांतरित किया, लेकिन गंभीर स्थिति होने के कारण दोपहर करीब 2 बजे उनकी मृत्यु हो गई।

"मरीज को बेहद गंभीर और नाजुक स्थिति में अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया था। हमारी टीम ने उन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट देकर सीधे आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। -डॉ. दिशा साहनी, चिकित्सक"

दूसरी तरफ इस पूरे मामले में नामजद यातायात पुलिसकर्मी राजकुमार शर्मा ने मृतक के बेटे द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि चेकिंग के समय बुजुर्ग की हालत इतनी गंभीर नहीं लग रही थी और बाइक की चाबी अपने पास जबरन रखने जैसी कोई भी बात पूरी तरह मनगढ़ंत है। फिलहाल ट्रैफिक पुलिस पर आरोप के मामले में पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे घटनाक्रम की सत्यता जानने के लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं ताकि ट्रैफिक पुलिस पर आरोप की इस दुखद घटना का सच सबके सामने आ सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। स्थानीय पुलिस प्रशासन की आधिकारिक जांच, अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के तथ्य विधिक प्रक्रियाओं के अधीन पूरी तरह परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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