अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू करने के लिए हस्ताक्षरित इस्लामाबाद ज्ञापन में शामिल समझौते की प्रमुख शर्तें आधिकारिक रूप से साझा कर दी गई हैं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने संवाददाताओं के सामने अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तें पढ़कर सुनाई हैं। "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन" शीर्षक वाले इस ऐतिहासिक दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य वर्तमान युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए दोबारा खोलना है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच सबसे कठिन विवादित मुद्दों, जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की प्रक्रिया को एक अंतिम समझौते पर सहमति बनने तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।[1]
यह अंतरिम कूटनीतिक कदम स्विट्जरलैंड में आगामी शुक्रवार से शुरू होने वाले व्यापक 60 दिवसीय वार्ता काल के लिए एक मजबूत रास्ता तैयार करता है। इस दस्तावेज़ में शामिल समझौते की प्रमुख शर्तें दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कड़वाहट को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं। इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर दोनों देशों के सर्वोच्च नेतृत्व ने अपनी सहमति जताई है जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में फैली अशांति और युद्ध के बाद अब स्थायी वैश्विक शांति की उम्मीदें काफी ज्यादा मजबूत हो गई हैं।
इस हस्ताक्षरित दस्तावेज के पहले बिंदु के अनुसार, अमेरिका और ईरान सहित उनके सभी सहयोगी दल लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करते हैं। दोनों देशों ने प्रतिबद्धता जताई है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध या सैन्य संचालन की शुरुआत नहीं करेंगे। इसके साथ ही दोनों पक्ष लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को पूरी तरह सुनिश्चित करने तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने पर पूरी तरह सहमत हुए हैं।
समझौते के नियमों के तहत वाशिंगटन तुरंत ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और किसी भी तरह की बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। अमेरिका इस नौसैनिक नाकेबंदी को अगले 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से समाप्त करने के लिए कानूनी रूप से वचनबद्ध हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान भी फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन के लिए 60 दिनों के लिए विशेष व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही तकनीकी व सैन्य बाधाओं को हटाकर अगले 30 दिनों में समुद्री मार्ग को बहाल किया जाएगा।
इस व्यापक शांति योजना के छठे बिंदु के तहत, अमेरिका क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक निश्चित योजना विकसित करने के लिए सहमत हुआ है। इस भारी-भरकम राशि के कार्यान्वयन तंत्र को अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया जाएगा। कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि वित्तीय सहायता से जुड़ी समझौते की प्रमुख शर्तें पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख देंगी।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका एक तय समय सारिणी के अनुसार ईरान के खिलाफ लगे सभी प्रकार के प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए तैयार हो गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी प्राथमिक व माध्यमिक एकतरफा प्रतिबंध शामिल हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े बैंकिंग लेनदेन व बीमा सेवाओं के निर्यात के लिए तत्काल प्रभाव से विशेष छूट जारी करेगा। इस प्रकार दोनों देशों के व्यापारिक हितों को संतुलित करने में समझौते की प्रमुख शर्तें एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।
ईरान ने इस दस्तावेज में अपने उस पुराने संकल्प को दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियारों का विकास या उन्हें प्राप्त नहीं करेगा। दोनों देश आईएईए की सीधी निगरानी में संवर्धित सामग्री को डाउन-ब्लेंडिंग करने की न्यूनतम पद्धति के आधार पर एक तंत्र विकसित करने पर सहमत हुए हैं। अंतिम समझौते पर बातचीत होने तक दोनों देश वर्तमान यथास्थिति को पूरी तरह बनाए रखेंगे, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति में कोई बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका इस क्षेत्र में कोई नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैनिक तैनात नहीं करेगा।
इसके अलावा, ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित की गई अरबों डॉलर की संपत्ति और संप्रदायों को पूरी तरह से उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान द्वारा नामित किसी भी अंतिम लाभार्थी को भुगतान करने के लिए इन फंडों का पूरा उपयोग किया जा सकेगा। इस अंतरिम समझौते के सफल कार्यान्वयन और भविष्य में अंतिम समझौते के अनुपालन की निगरानी के लिए एक प्रभावी कार्यकारी तंत्र भी स्थापित किया जाएगा। आगामी 60 दिनों की कूटनीतिक वार्ता अब यह तय करेगी कि यह अंतरिम व्यवस्था एक स्थायी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समर्थित बाध्यकारी प्रस्ताव में बदल पाती है या नहीं।
बहरहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इस कूटनीतिक बदलाव से यह साफ है कि दस्तावेज में निहित समझौते की प्रमुख शर्तें वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति संकट को संभालने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि दोनों देशों के बीच का यह कड़ा गतिरोध अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इस नए शांति समझौते ने दुनिया को एक बड़े महायुद्ध की विभीषिका से फिलहाल जरूर बचा लिया है। दोनों ही देश अब इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाकर मध्य पूर्व में शांति की एक नई और सुनहरी इबारत लिखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा नीतियों, दोनों देशों के विधिक समझौते और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के तथ्य कूटनीतिक मापदंडों के अधीन पूरी तरह परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।