मध्य पूर्व में शांति समझौते की घोषणा के बाद एशियाई स्टॉक मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के साथ वैश्विक बाजारों का हाल बदल रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद वैश्विक बाजारों का हाल काफी हद तक बदलता हुआ नजर आ रहा है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में प्रगति देखी जा रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करने के कारण एशियाई शेयर बाजारों में स्थिरता देखी गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर कुछ अनिश्चितताएं अभी भी बरकरार हैं, जिससे निवेशक काफी सतर्क नजर आ रहे हैं।
दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर इस अंतरिम समझौते के पाठ को सार्वजनिक कर दिया है, जो पहले से ही व्यापक रूप से चर्चा में था। यह नया समझौता इस साल अप्रैल में घोषित युद्धविराम को अगले साठ दिनों के लिए और आगे बढ़ाता है, ताकि दोनों पक्षों को एक अंतिम और स्थायी शांति समझौते पर विस्तार से बातचीत करने का पर्याप्त समय मिल सके। इस वैश्विक कूटनीतिक बदलाव के बीच शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट पूरी तरह से आर्थिक सुधारों और विभिन्न देशों की मौद्रिक नीतियों के रुझानों पर निर्भर हो गए हैं।[1]
एशिया-प्रशांत शेयरों के व्यापक सूचकांक में इस दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिला है। जहां जापान का निक्की शेयर औसत सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े शेयरों में मजबूत बढ़त के कारण इतिहास में पहली बार 71,000 के स्तर को पार कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, वहीं दक्षिण कोरियाई शेयरों में भी शून्य दशमलव नौ प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। अमेरिकी शेयर वायदा में भी इस दौरान हल्की बढ़त देखी गई है, जो निवेशकों के सुधरते भरोसे को दर्शाती है।
दूसरी ओर, बेंचमार्क दस वर्षीय जापानी सरकारी बांड का प्रतिफल दो आधार अंक बढ़कर दो दशमलव छह दो शून्य प्रतिशत पर पहुंच गया। अमेरिकी वॉल स्ट्रीट पर कल रात तीनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी, क्योंकि व्यापारियों को आशंका है कि फेडरल रिजर्व का अगला कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी का हो सकता है। नए फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल देने के बाद से ही वैश्विक बाजारों का हाल काफी संवेदनशील बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जहां अमेरिकी क्रूड एक दशमलव दो पांच प्रतिशत गिरकर 75 दशमलव आठ तीन डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड एक दशमलव चार प्रतिशत घटकर 78 दशमलव चार एक डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के संकट से उबरने के बाद वर्ष 2027 में तेल बाजार में एक महत्वपूर्ण आपूर्ति अधिशेष की स्थिति बनने की पूरी संभावना है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलेगी।
"बड़ा भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बना हुआ है और यह बाजार की गतिविधियों का एक प्रमुख चालक भी रहेगा।" - काइल रोडा, वरिष्ठ वित्तीय बाजार विश्लेषक, कैपिटल डॉट कॉम
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर जापानी येन के मुकाबले 160 दशमलव छह का स्तर पार कर गया, जो जुलाई 2024 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। डॉलर इंडेक्स, जो अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को मापता है, उसमें मामूली गिरावट देखी गई है। इस बीच, बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक पर भी निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं, जहां नीति निर्माताओं की टिप्पणियों के आधार पर वैश्विक बाजारों का हाल आने वाले दिनों में एक नया और निर्णायक रुख अख्तियार कर सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। शेयर बाजार, कमोडिटी, बांड प्रतिफल और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में निवेश पूरी तरह से बाजार जोखिमों के अधीन है और इनमें भारी वित्तीय उतार-चढ़ाव संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।