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अनियंत्रित बोलेरो 500 मीटर नीचे गिरी: 7 लोग भीषण सड़क हादसे का शिकार

पहाड़ी क्षेत्र में मुंडन संस्कार से लौट रहे ग्रामीणों की गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई जिससे सात लोग भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए।

By अजय त्यागी 1 min read
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भीषण सड़क दुर्घटना

चंबा, हिमाचल प्रदेश। चंबा मसरूंड मार्ग पर छतरूंड के समीप एक बोलेरो गाड़ी अनियंत्रित होकर करीब पांच सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी जिससे उसमें सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में पहले भी कई लोग भीषण सड़क हादसे का शिकार हो चुके हैं।[विडियो]

प्राप्त जानकारी के अनुसार गाड़ी में ग्राम महल पंचायत के सपरोठ गांव के छह लोग सवार थे जिनमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे। इनके साथ वाहन का चालक भी मौजूद था जो उन्हें काकड़ोथा गांव में आयोजित एक मुंडन संस्कार से वापस घर लेकर लौट रहा था। इसी दौरान छतरूंड के पास अचानक चालक ने नियंत्रण खो दिया और गाड़ी सीधे खाई में समा गई। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर भारी मशक्कत के बाद सभी सात शवों को बाहर निकाला।

राहत और बचाव कार्य

हादसे की भयावहता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित गति से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और भीषण सड़क हादसे का शिकार शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। प्रारंभिक पड़ताल में सड़कों की स्थिति, वाहन की गति और यांत्रिक खराबी जैसे संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। इस घटना ने सपरोठ पंचायत के ग्रामीण परिवारों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है और गांव में मातम पसरा हुआ है।

"स्थानीय निवासी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और शवों को बाहर निकालने में मदद की, जिन्हें बाद में चंबा अस्पताल ले जाया गया। मृतकों में 3 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल थे, जो सभी कुथेड के एक ही परिवार के थे। दुर्घटना तब हुई जब वे रात में बाहर खाना खाने के बाद देर से लौटे थे।" - रवि कुमार, प्रधान, मसरूंड

पहाड़ी जिलों में संकरे और घुमाव दार रास्ते हमेशा से ही चालकों के लिए बड़ी चुनौती रहे हैं और तीव्र ढलानों के कारण अक्सर ऐसे क्षेत्रों में लोग भीषण सड़क हादसे का शिकार बन जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ब्लैक स्पॉट्स को चिह्नित कर वहां पर कड़े सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। क्रैश बैरियर और उचित चेतावनी बोर्ड न होने की वजह से भी इस प्रकार के पर्वतीय सड़क मार्गों पर लगातार दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है।

सड़क सुरक्षा की चिंता

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञ समय समय पर सुरक्षा मानकों को सुधारने की वकालत करते रहे हैं क्योंकि लापरवाही और बुनियादी ढांचे की कमी इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ती है। इस मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवाना बेहद जरूरी हो चुका है। जब तक संवेदनशील मोड़ों पर सुरक्षा दीवारें नहीं बनाई जातीं तब तक ऐसे खतरनाक पहाड़ी ढलानों पर दुर्घटनाओं को रोकना बेहद मुश्किल होगा।

मारे गए लोगों की पहचान चुनी लाल, देवी लाल, मोती राम, बबली देवी, कुंता देवी और अनीता कुमारी के रूप में हुई है जो एक ही गांव के निवासी थे। इनके साथ वाहन चालक मनोहर लाल ने भी अपनी जान गंवा दी है। प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को नियमों के तहत सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भीषण त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन को दुरुस्त किए बिना मासूम लोगों को भीषण सड़क हादसे का शिकार होने से बचाना मुमकिन नहीं है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क हादसों, दुर्घटना के कारणों और प्रशासनिक जांच के विवरण प्राप्त जानकारियों के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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