नगरीय निकायों में नियमों के कारण वाल्मीकि समाज सड़कों पर उतर आया है जिससे सफाई कर्मी भर्ती का विरोध प्रदेश स्तर पर तेज हो गया है।
सफाई कर्मी भर्ती का विरोध
जयपुर, राजस्थान। प्रदेश के नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर वाल्मीकि समाज और विभिन्न सफाई कर्मचारी संगठनों के बीच आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। सरकार के साथ पूर्व में हुए समझौतों को पूर्ण रूप से लागू करने और निकायों में ठेके या मस्टर रोल पर कार्यरत कार्मिकों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर पदाधिकारियों ने शुक्रवार से क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलित कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तेईस जून तक सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो प्रदेशभर में झाड़ू डाउन हड़ताल की जाएगी जिससे सफाई कर्मी भर्ती का विरोध अब बड़े आंदोलन में बदल चुका है। [1]
संयुक्त वाल्मीकि सफाई श्रमिक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार जयपुर नगर निगम और स्थानीय निकाय विभाग के आला अधिकारियों के साथ इस संबंध में कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। पूर्व में घोषित तीस हजार पदों में से वर्तमान में चौबीस हजार सात सौ तिरानवे रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है जिससे सफाई कर्मी भर्ती का विरोध व्यापक रूप ले रहा है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि वर्तमान भर्ती में अनुभव प्रमाण-पत्र के साथ कर्मचारी राज्य बीमा और भविष्य निधि यानी पीएफ का नया नियम अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है। यह नई व्यवस्था धरातल पर वर्ष 2017 से लागू हुई है जबकि इससे पूर्व कई सफाई कर्मचारी ठेका प्रणाली और मस्टर रोल पर विभिन्न शहरों में वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे पुराने अनुभवी कर्मचारियों के पास ईएसआई और पीएफ का कोई वैध रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें इस नई चयन प्रक्रिया से बाहर होना पड़ सकता है।
रॉयल वाल्मीकि जस्टिस फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2018 की पिछली भर्ती प्रक्रिया में भी समाज के हक के साथ गंभीर अन्याय हुआ था जिसे इस बार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन वर्ग आधारित वर्गीकरण का विरोध नहीं कर रहा है लेकिन जो भी व्यक्ति इस पद पर नियुक्त हो उससे मूल रूप से सफाई का कार्य ही लिया जाना चाहिए। कड़े नियमों के कारण वर्षों का लंबा जमीनी अनुभव रखने वाले गरीब तबके के लोगों के हितों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।
"सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर पूर्व में हुए समझौतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है और जटिल नियमों से पुराने अनुभवी कर्मियों का नुकसान होगा, इसलिए तेईस जून तक मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे राजस्थान में पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।" : शिवचरण डंडोरिया, सलाहकार, संयुक्त वाल्मीकि सफाई श्रमिक संघ
दूसरी तरफ सफाई कर्मी भर्ती का विरोध और हड़ताल की चेतावनी के बाद नगर निगम प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारी संगठनों से लगातार शांति बनाए रखने और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुचारू रखने की अपील की जा रही है। निगम के अनुसार कर्मचारियों की इन प्रमुख आपत्तियों और जायज मांगों से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव को तैयार कर राज्य सरकार के सक्षम स्तर तक त्वरित रूप से भिजवा दिया गया है ताकि जल्द ही नीतिगत रास्ता निकाला जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आगामी समय में उत्पन्न होने वाली संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक सफाई कार्यबल की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। शहर की जनता को कचरे और गंदगी के संकट से बचाने के लिए प्रशासन हर आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है। फिलहाल क्रमिक अनशन स्थल पर कर्मचारियों की भीड़ निरंतर बढ़ती जा रही है और सरकार के स्तर से किसी ठोस समाधान की उम्मीद में सफाई कर्मी भर्ती का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। राजस्थान नगरीय निकाय सफाई कर्मचारी भर्ती के नियमों, पीएफ-ईएसआई छूट संबंधी आधिकारिक आदेशों, अनशन की वर्तमान स्थिति और स्वायत्त शासन विभाग की आगामी कार्ययोजना से जुड़े किसी भी प्रामाणिक विवरण के लिए स्थानीय नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।