कांगो के किगोंजे विस्थापित नागरिक शिविर में ईबोला का कहर चिंता का विषय बन गया है। डेढ़ माह में लगभग तीस लोगों की मौत हो चुकी है।
मृतकों का अंतिम संस्कार
ब्यूनिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो। पूर्वोत्तर कांगो के एक नागरिक राहत शिविर में मई महीने की शुरुआत से लेकर अब तक कम से कम तीस लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। शिविर के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मौत की यह अप्रत्याशित दर पहले कभी नहीं देखी गई। मृतकों में दिखाई दे रहे गंभीर लक्षणों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि वहां घातक इबोला वायरस बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईबोला का कहर वहां रह रहे हजारों विस्थापितों के बीच खौफ का माहौल बनकर पसरा हुआ है। [1]
कांगो में इबोला प्रकोप के मुख्य केंद्र ब्यूनिया में स्थित किगोंजे शिविर के भीतर मरीजों या उनके परिजनों द्वारा जीवित अथवा मृत लोगों की चिकित्सकीय जांच कराने से साफ इनकार किए जाने के कारण मौतों के सटीक कारणों की तुरंत पुष्टि करना संभव नहीं हो सका था। कैथोलिक सहायता संगठन कैरिटास और शिविर के प्रवक्ता ने बताया कि लोगों के कड़े विरोध के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी हैं। हालांकि, सभी मृतकों में तेज सिरदर्द, बुखार और उल्टी जैसे शुरुआती लक्षण पाए गए थे, जो स्पष्ट रूप से ईबोला का कहर होने का संकेत देते हैं।
किगोंजे विस्थापित शिविर में वर्तमान समय में पंद्रह हजार से अधिक नागरिक निवास कर रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी के बीच अचानक बढ़ी मौतों ने इस डर को और ज्यादा पुख्ता कर दिया है कि इबोला वायरस पूर्वी कांगो के लगभग पचास लाख से अधिक विस्थापित लोगों के बीच बिना किसी पहचान के अंदर ही अंदर फैल रहा है। स्वास्थ्य जांच के प्रति स्थानीय स्तर पर जारी कड़े प्रतिरोध और शिविरों में बेहद सीमित स्वच्छता उपायों के कारण चिकित्सा तंत्र के सामने इस समय एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है।
शिविर के अध्यक्ष डीजेडडीजो एनद्रुत्सी एटिएने ने बताया कि केवल चालू सप्ताह के भीतर ही दस शवों को दफनाया जा चुका है, जबकि आम दिनों में इस शिविर में पूरे महीने के दौरान केवल एक से तीन मौतें ही दर्ज की जाती थीं। कैरिटास संगठन के निदेशक जस्टिन ज़नामुज़ी ने बताया कि उनकी टीम ने बुधवार को चादरों से ढके हुए कई शव देखे, जिनमें एक गर्भवती महिला और मासूम बच्चे भी शामिल थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सुरक्षात्मक सूट पहने स्वास्थ्य कर्मी शवों को कीटाणुरहित करते और ताबूत तैयार करते दिखे, जिससे ईबोला का कहर स्पष्ट उजागर होता है।
"हमारी टीम ने पीड़ित लोगों को इस बात के लिए मनाने का बहुत प्रयास किया कि डॉक्टर शवों की बारीकी से जांच कर सकें, लेकिन उन्होंने पूरी तरह मना कर दिया। स्वास्थ्य कर्मियों ने अब पांच पीड़ितों के नमूने लिए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है।" : जस्टिन ज़नामुज़ी, निदेशक, कैरिटास संगठन
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों और चार प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि मौतों में अचानक आया यह उछाल दर्शाता है कि दाताओं द्वारा पानी और स्वच्छता के बजट में की गई भारी कटौती के कारण आम बस्तियां इस समय बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि कांगो में शौचालयों और हाथ धोने के स्टेशनों के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता वर्ष 2024 और 2025 के बीच घटकर लगभग आधी रह गई है। इस बुनियादी कमी के चलते युद्ध से भाग रहे नागरिकों के शिविरों में ईबोला का कहर बेकाबू हो रहा है।
कांगो में विस्थापितों के लिए बने सैकड़ों शिविरों में से कुछ में एक लाख से अधिक लोग बेहद दयनीय स्थितियों में रह रहे हैं। किगोंजे शिविर में बड़े परिवार महज एक मीटर से भी कम दूरी पर बने प्लास्टिक के टेंट साझा करते हैं और बच्चे नंगे पैर घूमते हैं। पर्याप्त शौचालय न होने और उनके लगातार भरे रहने के कारण लोग नंगे हाथों से उन्हें साफ करने को मजबूर हैं। विभिन्न सहायता समूहों जैसे मर्सी कॉर्प्स और ऑक्सफैम ने बताया कि बजट में कमी के कारण स्वच्छ पेयजल और सार्वजनिक शौचालयों की आपूर्ति को बहुत बड़े पैमाने पर घटा दिया गया है, जिसने अंततः इस क्षेत्र में ईबोला का कहर और अधिक गंभीर कर दिया है।