बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में दस दिन से आंदोलन जारी है, जहां लोग पीबीएम की अव्यवस्थाओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
धरने का दसवां दिन
बीकानेर, राजस्थान। पीबीएम अस्पताल की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के खिलाफ कांग्रेस द्वारा संचालित विरोध प्रदर्शन शनिवार को अपने दसवें दिन भी जारी रहा। इतने लंबे समय तक चले इस विरोध के बावजूद, अस्पताल प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक किसी प्रकार का ठोस समाधान नहीं निकला है। धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थानीय स्तर पर पीबीएम की अव्यवस्थाओं को लेकर चल रहे इस आंदोलन का फिलहाल प्रशासन पर कोई सार्थक असर दिखाई नहीं दे रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में मेडिकल विंग और जनाना विंग को तुरंत प्रभाव से सुचारू करना शामिल है। अस्पताल की दस सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा मशाल जुलूस रोकने और लाठीचार्ज जैसी घटनाओं का पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने धरने पर पहुंचकर अपनी एकजुटता व्यक्त की और कहा कि प्रशासन का यह मौन संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अस्पताल में प्रसूताओं की बिगड़ती तबीयत और हालिया मौतों के बाद भी पीबीएम की अव्यवस्थाओं में सुधार न होना सिस्टम की बड़ी विफलता है।
"अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अत्यंत आवश्यकता है। कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही जनहित की मांगों पर सरकार को अविलंब सुनवाई करनी चाहिए और व्यवस्था सुधारनी चाहिए।" : डॉ. बीडी कल्ला, पूर्व मंत्री
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेसजन और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह धरना कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में जारी है और जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रशासन के मौन रवैये के कारण अब आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने पर चर्चा की जा रही है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पीबीएम की अव्यवस्थाओं के कारण आमजन का आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अस्पताल की व्यवस्थाओं, आंदोलन की मांगों और प्रशासनिक प्रतिक्रियाओं के आधिकारिक विवरण हेतु संबंधित विभागीय नोटिफिकेशन को ही आधार मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।