स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को बंद करने के एलान ने अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को संकट में डाल दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज
वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, क्षेत्रीय स्थिति एक बार फिर बेहद विस्फोटक हो गई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को अब बंद कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने चार महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक अंतरिम डील को अंतिम रूप दिया था। ईरान का यह आक्रामक रुख स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की रणनीतिक संवेदनशीलता के कारण पूरी दुनिया में खलबली मचा रहा है और शांति वार्ता की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। [1]
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस आपूर्ति मार्ग है, जिससे प्रतिदिन लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है। ईरान का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को बंद करने का निर्णय इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे कथित "अपराधों" और अमेरिका द्वारा पूर्व में किए गए युद्धविराम की शर्तों के उल्लंघन के विरोध में लिया गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में अप्रत्याशित उछाल और महंगाई का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के तहत प्रतिबंधों में ढील और संपत्तियों को मुक्त करने पर सहमति बनी थी, लेकिन स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर ईरान का यह कदम पूरी डील को पटरी से उतारने के लिए पर्याप्त है।
"मुझे उम्मीद है कि मैं अगले कुछ दिनों में स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो जाऊंगा, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, यह कूटनीतिक प्रोटोकॉल और तकनीकी समन्वय की एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है।" - जेडी वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति
स्विट्जरलैंड के बुरगेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शांति के तकनीकी पहलुओं पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति विपरीत है। लेबनान में इजरायली हमलों और हिजबुल्लाह के जवाबी संघर्ष में अब तक 3,912 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिससे युद्धविराम की नींव कमजोर हो गई है। इजरायल ने स्वयं को इस डील से अलग रखा है और कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है। ईरान के इस निर्णय के बाद कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज अब बंद रहेगा, शांति वार्ता का भविष्य एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है जहां कूटनीति और सैन्य संघर्ष का टकराव अपरिहार्य प्रतीत हो रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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