अंतरराष्ट्रीय

क्या थमेगी जंग? अमेरिका ईरान शांति वार्ता का पहला दौर संपन्न

अमेरिका ईरान शांति वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड में संपन्न हुआ। रोडमैप तैयार, लेबनान में हिंसा थमेगी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही होगी शुरू।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

ब्यूर्गेनस्टॉक, स्विट्जरलैंड। अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड में संपन्न हो गया है। यह वार्ता अत्यंत तनावपूर्ण माहौल में आयोजित हुई, क्योंकि तेहरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा की थी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़े तेवर दिखाए थे। कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने एक संयुक्त बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देश अब अमेरिका ईरान शांति वार्ता के रोडमैप के तहत अगले 60 दिनों में एक अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। [विडियो]

ब्यूर्गेनस्टॉक के पर्वतीय रिसॉर्ट में तकनीकी वार्ता पूरे सप्ताह जारी रहेगी। कतरी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने लेबनान में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक कार्ययोजना पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, विवादित जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक संचार लाइन भी खोली गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले सप्ताह हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के आधार पर इन चर्चाओं का नेतृत्व किया है, ताकि अप्रैल से चले आ रहे संघर्ष विराम को कम से कम 60 दिनों के लिए और बढ़ाया जा सके।

कूटनीतिक प्रयास और चुनौतियां

वार्ता के दौरान कतरी मध्यस्थों की उपस्थिति में विभिन्न जटिल मुद्दों पर बातचीत हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने लेबनान में जारी हिंसा के प्रभाव को कमतर आंकते हुए कहा कि शत्रुता समाप्त करने की दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि "ये चीजें हमेशा थोड़ी उलझी हुई होती हैं," लेकिन इसके बावजूद वार्ता प्रक्रिया सक्रिय रही। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकजी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने तेल निर्यात के लिए छूट, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और पुनर्निर्माण योजना का आश्वासन सुरक्षित कर लिया है।

अमेरिकी राजनयिकों के अनुसार, अमेरिका ईरान शांति वार्ता में हॉर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान की स्थिति और परमाणु मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि उच्च स्तरीय चर्चा सोमवार को समाप्त होने की उम्मीद है, जबकि तकनीकी विशेषज्ञ वार्ता के तकनीकी पहलुओं पर काम जारी रखेंगे। हालांकि, ईरान ने तर्क दिया था कि अमेरिका लेबनान में लड़ाई रोकने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने में विफल रहा, जिसके चलते उसने समुद्री यातायात को रोकने का कदम उठाया था।

तनावपूर्ण स्थितियां

वार्ता शुरू होने से ठीक पहले, राष्ट्रपति ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रयास किया, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने यहां तक कहा कि अमेरिका जलडमरूमध्य पर कब्जा कर सकता है। इसके बावजूद, वेंस ने संवाददाताओं को बताया कि राष्ट्रपति ने उन्हें ईरान के साथ संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने का निर्देश दिया है।

ईरान की तस्नीम एजेंसी के अनुसार, ट्रम्प की धमकियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने सीधे वार्ता कक्ष में लौटने से परहेज किया, हालांकि मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहा। ईरान का मानना है कि परमाणु मामलों पर ठोस बातचीत के लिए फ्रीज संपत्तियों की रिहाई और तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलना अनिवार्य है। इस प्रकार, अमेरिका ईरान शांति वार्ता के सफल कार्यान्वयन के लिए अभी भी कई राजनीतिक और तकनीकी बाधाएं बनी हुई हैं।

आर्थिक और मानवीय प्रभाव

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसका बंद होना वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बनता है। हालांकि अमेरिका ने पूर्ण बंदी के दावों को खारिज किया, लेकिन केपलर के डेटा से पता चलता है कि रविवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई। इस अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में भी $1 से अधिक की तेजी देखी गई।

लेबनान की स्थिति पर नजर डालें तो वहां लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, लेकिन रविवार को हिंसा में कमी के संकेत मिले। निवासियों की अपने घरों की ओर वापसी शुरू हो गई है, जो संघर्ष विराम की आशा जगाती है। कुल मिलाकर, यह अमेरिका ईरान शांति वार्ता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए उम्मीद की एक किरण है, जिसका भविष्य अब तकनीकी वार्ता और दोनों देशों की आपसी प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिस्थितियां अत्यधिक परिवर्तनशील होती हैं, जिनके कारण समझौते के क्रियान्वयन में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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