वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और संकट का दौर शुरू हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से हर तरफ भारी तनाव देखा जा रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
सिंगापुर। सोमवार को वैश्विक स्तर पर एक बार फिर भारी अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीमी होने और अमेरिका तथा ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के तहत पहली बैठक के कठिन दौर के कारण बाजार में यह स्थिति पैदा हुई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, ब्रेंट क्रूड वायदा चौवन सेंट यानी शून्य दशमलव छह सात प्रतिशत बढ़कर इक्यासी दशमलव एक एक डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि सत्र की शुरुआत में यह बयासी दशमलव तीन शून्य डॉलर के उच्च स्तर पर था। [1]
अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा में भी अनुबंध की समाप्ति से पहले दो दशमलव शून्य दो डॉलर यानी दो दशमलव चौंसठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह अठहत्तर दशमलव बासठ डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अधिक सक्रिय अगस्त का अनुबंध एक दशमलव तैंतालीस डॉलर बढ़कर सतहत्तर दशमलव अट्ठाईस डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। शुक्रवार को छुट्टी होने के कारण अमेरिकी बाजार बंद थे, जिससे सोमवार को शुरुआती कारोबार में यह तीव्र उछाल आया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली शिपिंग में रविवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि ईरान ने इजरायल और अमेरिका द्वारा अंतरिम शांति समझौते के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस जलमार्ग को फिर से बंद करने की घोषणा की। शिपिंग डेटा से स्पष्ट है कि इस कार्रवाई के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने वैश्विक बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया है। एमएसटी मार्की के ऊर्जा अनुसंधान प्रमुख शाऊल कवोनीक ने कहा कि बाजार द्वारा इस जलमार्ग के खुलने की उम्मीद जल्दबाजी थी।
"ईरान संभवतः जलडमरूमध्य से प्रवाह को रोकने के लिए लगातार नए बहाने ढूंढता रहेगा, क्योंकि मध्य अवधि तक यही उनके पास दबाव बनाने का एकमात्र बिंदु है जिसे वे छोड़ना नहीं चाहते।" - शाऊल कवोनीक, ऊर्जा अनुसंधान प्रमुख, एमएसटी मार्की।
ईरान की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अंतरिम शांति समझौते के तहत पहली वार्ता के लिए रविवार को ईरानी अधिकारियों से मिले। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले फिर से शुरू करने की धमकी दी है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में लड़ाई रोकने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जिससे कूटनीतिक प्रयास कमजोर हो रहे हैं।
लेबनान की राज्य समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार, वहां एक दिन पहले ही हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष विराम लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य महीनों से जारी हिंसा को रोकना था। इसके बावजूद शनिवार को इजरायली हमलों में कम से कम बीस लोग मारे गए। आईजी बाजार विश्लेषक टोनी सिकोमोर ने एक नोट में उल्लेख किया कि लेबनान की यह वर्तमान स्थिति संघर्ष विराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
"लेबनान की स्थिति संघर्ष विराम और जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने दोनों के लिए एक गंभीर और निरंतर खतरा पैदा कर रही है।" - टोनी सिकोमोर, बाजार विश्लेषक, आईजी।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से ठीक पिछले सप्ताह बाजार में आठ प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई थी, क्योंकि खाड़ी में फंसे कार्गो के निकलने और प्रतिबंध हटने की उम्मीद थी। नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी के प्रमुख हामिद बोवर्ड ने रविवार को सरकारी टीवी को बताया कि सोमवार से अब तक पच्चीस मिलियन बैरल से अधिक ईरानी तेल वर्चुअल नाकाबंदी लाइन से गुजरा है। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक ने भी पिछले सप्ताह अधिक तेल की पेशकश की है।
इराक के उप तेल मंत्री ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि इराक अपने कच्चे तेल के उत्पादन को धीरे-धीरे बयालीस लाख से तैंतालीस लाख बैरल प्रति दिन के बीच बहाल करने की योजना बना रहा है। इस तरह विभिन्न देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के दावों और कूटनीतिक वार्ताओं के कठिन दौर के बीच बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधानों के कारण बाजार में स्थिरता की राह बेहद कठिन नजर आ रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि जब तक इस मार्ग से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामों पर पूरी दुनिया के विश्लेषकों का ध्यान केंद्रित कर दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत परिवर्तनशील हैं, जिनके कारण कीमतों में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।