सोने के व्यापार में मंदी के कारण गहनों की मांग में भारी गिरावट आई है। कारीगरों और व्यापारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
सोने के व्यापार में मंदी का असर पिछले कुछ महीनों में अत्यधिक बढ़ा है, जिससे हजारों कारीगरों और स्थानीय व्यापारियों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मई में जनता से सोने की खरीद से परहेज करने की अपील के बाद, सोने का व्यापार सुस्त पड़ गया है और बाजार की स्थिति चिंताजनक हो गई है। ग्राहक अब सोने के बजाय चांदी की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इस पारंपरिक उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोने की मांग में 50 से 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरा आभूषण निर्माण केंद्र सन्नाटे में है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सोने के गहनों की बिक्री में आई इस गिरावट के कारण अब ग्राहक चांदी को एक सस्ता और सुरक्षित विकल्प मानकर चुन रहे हैं। पहले जहां प्रतिदिन नए ऑर्डर मिलते थे, वहीं अब काम लगभग पूरी तरह रुक गया है, जिससे कर्मचारियों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है। [1]
सोने के व्यापार में मंदी के चलते राधेश्याम सोनी जैसे व्यापारियों का व्यवसाय लगभग 40 प्रतिशत तक सिमट गया है। उनका कहना है कि सोने की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण पुराने ऑर्डरों को नए दामों पर पूरा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्हें ग्राहकों को वर्तमान बाजार स्थिति समझाना बेहद कठिन लग रहा है, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और लोग भारी निवेश करने से बच रहे हैं।
एक अन्य व्यवसायी संजय सोनी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि सोना कभी एक सुरक्षित निवेश का जरिया माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। हालांकि पहले बड़ी संख्या में लोग सोने में निवेश करते थे, लेकिन अब केवल 10 प्रतिशत लोग ही इस पर ध्यान दे रहे हैं। बाजार में सोने के व्यापार में मंदी के कारण एडवांस ऑर्डरों का मिलना लगभग बंद हो गया है, जिससे भविष्य को लेकर अनिश्चितता व्याप्त है।
सोने के व्यापार में मंदी का सबसे अधिक प्रभाव उन कुशल कारीगरों और श्रमिकों पर पड़ा है जो आभूषण बनाने का काम करते हैं। बंगाल के एक कारीगर शेख आसिफ ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि अप्रैल तक वे हर महीने 700-800 ग्राम सोने के आभूषण तैयार करते थे, लेकिन जून के मध्य तक उनके पास केवल 200 ग्राम बनाने का काम आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके लिए अपने कमरे का किराया देना भी मुश्किल हो गया है।
काम की कमी के कारण कई प्रवासी कारीगर अपने घर वापस लौटने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि उन्हें पहले की तुलना में मात्र 20-30 प्रतिशत काम मिल रहा है। कारीगरों का कहना है कि वे अब दो वक्त की रोटी और अन्य जरूरी खर्चों का बोझ उठाने में भी असमर्थ महसूस कर रहे हैं। सोने के व्यापार में मंदी ने इन कारीगरों के लिए अपने अस्तित्व को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बना दिया है, जिससे उनका मनोबल काफी टूट गया है।
अब चांदी ही इन कारीगरों के लिए थोड़ी उम्मीद जगा रही है और वे सोने के बजाय चांदी के आभूषण बनाने की ओर मुड़ रहे हैं। कारीगर महबूब ने बताया कि उन्हें अब सोने से अधिक चांदी के ऑर्डर मिल रहे हैं, हालांकि यह काम उनकी खोई हुई आय की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर पा रहा है। एक अन्य कारीगर अब्दुल मलिक ने बताया कि पहले उन्हें एडवांस में बड़े ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब उन्हें काम की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
वहीं एक अन्य कारीगर शरीफ मंडल ने कहा कि कम मांग के कारण उन्हें काम ढूंढना बेहद मुश्किल हो रहा है और वे अब रोजगार के लिए पूरी तरह हताश हैं। आभूषण उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो सोने के व्यापार में मंदी का संकट और गहरा सकता है। वे सरकार से इस पारंपरिक उद्योग को बचाने और लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। व्यापारिक मंदी और आभूषण उद्योग के आंकड़ों से संबंधित जानकारी ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।