उत्तर प्रदेश

यौमे आशूरा पर अकीदतमंदों ने निकाला ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में यौमे आशूरा पर ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस निकाला गया जिसमें हजारों की संख्या में अज़ादार शामिल हुए और मातम किया।

By अजय त्यागी 1 min read
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ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। राजधानी लखनऊ में नाज़िम अली इमामबाड़े से शुक्रवार को यौमे आशूरा का ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में हजारों की तादाद में अज़ादार शामिल हुए। इस दौरान या हुसैन, या सकीना, या अब्बास और या मौला अली के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। सिद्धार्थनगर में भी मुहर्रम का पर्व बड़े ही अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। हजरत इमाम हुसैन की याद में आजादारों ने भव्य जुलूस निकाला और मातम किया। बरेली के बहेड़ी नगर में मुहर्रम के अवसर पर ताजियों की अधिकतम ऊंचाई बारह फीट निर्धारित किए जाने के बाद सभी ताजिए को इमामबाड़ों में ही रखे गए। जुलूस का नेतृत्व मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना कल्बे जवाद ने किया। [1]

ईटीवी भारत से बातचीत में मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि जब हज़रत इमाम हुसैन से पूछा गया कि वह किस मुल्क में जाना पसंद करेंगे, तो उन्होंने किसी मुस्लिम देश का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान का नाम लिया था। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान से हमें अपने वतन की खुशबू आती है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में हज़रत इमाम हुसैन से मोहब्बत करने वालों की बड़ी तादात है। झांसी की रानी के नाम का ताज़िया, महाराजा बनारस के नाम का ताज़िया और कई हिंदू राजाओं के नाम से आज भी ताज़िए रखे जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने इमाम हुसैन शीर्षक से कर्बला पर पुस्तक लिखी, जो गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करती है।

ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस

मौलाना ने कहा कि आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन के चाहने वाले उन्हें याद कर, मातम कर रहे हैं। लखनऊ की अवाम भी सड़कों पर उतरकर या हुसैन, या अली के नारे लगाते हुए कर्बला तक जाएंगे, जहां ताज़िए दफन किए जाएंगे। ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस के दौरान कुछ बच्चों के हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अली खामेनेई की तस्वीरें भी दिखाई दीं। प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद इस बार सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं कराया गया, जबकि, हर साल ऐसा किया जाता था। उन्होंने कहा कि सड़कें इतनी गर्म हैं कि लोगों के पैरों में छाले पड़ रहे हैं।

इसे उन्होंने प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया। फिरोजाबाद में पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी द्वारा ताज़ियों को इंची टेप से नापे जाने के मामले पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और यह मुख्यमंत्री के निर्देशों की भी अवहेलना है। वहीं, मौलाना सैफ अब्बास ने ईटीवी भारत से कहा कि इंसानियत की हिफाज़त के लिए हज़रत इमाम हुसैन ने अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी थी। उसी कुर्बानी की याद में दुनिया भर के लोग आज ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस के रूप में सड़कों पर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के इमाम हुसैन को याद करते हैं।

आकर्षण का केंद्र

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि जिस तरीके से ताजिए को इंची टेप से नापा जा रहा है, इस तरीके से कावड़ यात्रा में भी इंची टेप लेकर, क्या यह पुलिस अधिकारी सड़क पर उतरेंगे। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि दुनिया भर में लोग अपने बच्चों का नाम हुसैन रखते हैं, कोई अपने बच्चे का नाम यज़ीद नहीं रखता। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चे भी जंजीरी मातम कर रहे हैं। एक मां अपने बच्चे की उंगली कटने पर भी तड़प उठती है, लेकिन यहां बच्चे जंजीरी मातम करते हैं और जब उनके कपड़े खून से भीग जाते हैं, तो उनकी माएं इसे मोहब्बत मानती हैं।

माएं इसे इमाम हुसैन की मोहब्बत और अकीदत का प्रतीक मानती हैं। मौलाना सैफ ने कहा कि भीषण गर्मी उनके लिए कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि वे कर्बला के उस मैदान को याद करते हैं जहां हज़रत इमाम हुसैन और उनके परिवार ने शहादत दी थी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी, आरएएफ और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। शांतिपूर्ण ढंग से जुलूस नाज़िम अली इमामबाड़े से करीब तीन किलोमीटर दूर कर्बला तालकटोरा की ओर बढ़ा है। जुलूस में इस बार मेवे से तैयार किया गया एक अनोखा अलम भी आकर्षण का केंद्र रहा।

सुरक्षा के इंतजाम

करीब पचास किलोग्राम मेवों से तैयार इस अलम में मखाना, खजूर, छुहारा, बादाम, अंजीर और नारियल का इस्तेमाल किया गया है, जिसे कर्बला तालकटोरा ले जाया गया है। इसके अलावा चांदी के अलम भी जुलूस में शामिल हैं। गुलाब के फूलों से सजे जुलूस में बड़ी संख्या में युवा नौहा पढ़ते और मातम करते हुए कर्बला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। अकबरी गेट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां भारी संख्या में पुलिस बल, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं तैनात हैं। मीनारा मस्जिद पर सुन्नी समुदाय का पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ।

शिया समुदाय का जुलूस अकबरी गेट से होकर कर्बला तालकटोरा पहुंचा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अकबरी गेट पर बड़ा पर्दा भी लगाया और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखा। वहीं, सिद्धार्थनगर उपनगर हल्लौर में श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक मुहर्रम जुलूस निकाला और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मातम करने वाले श्रद्धालुओं ने कहा कि पूरी दुनिया में अमन व शांति कायम रहे, इसी उद्देश्य से हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अन्याय व जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की और अपनी जान की कुर्बानी दी थी।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भीषण गर्मी और भीड़भाड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा एवं यातायात नियमों का पालन करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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