बीकानेर जिला पुलिस द्वारा अवैध तस्करी के मामलों में बरामद करोड़ों के मादक पदार्थ नष्ट कर तस्करों को कड़ा संदेश दिया गया है।
मौके पर उपस्थित पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा
बीकानेर, राजस्थान। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बीकानेर पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के विभिन्न मामलों में जब्त किए गए करोड़ों रुपये मूल्य के अवैध मादक पदार्थों का नियमानुसार नष्टीकरण किया। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा की मौजूदगी में गठित ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी की उपस्थिति में संपन्न हुई। पुलिस के अनुसार जिले में दर्ज कुल 130 मामलों में जब्त किए गए मादक पदार्थों का वैज्ञानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी तरह नष्टीकरण किया गया। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान करोड़ों के मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
इस प्रकार नष्ट किए गए विभिन्न श्रेणी के मादक पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत 3 करोड़ 21 लाख 36 हज़ार 275 रुपये आंकी गई है। पुलिस की इस मुहिम से अवैध नशे के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। जिले को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पुलिस का यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना रहा है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। विशेष रूप से गठित टीम ने सभी रसायनों और अवैध नशीली सामग्रियों का गहनता से भौतिक सत्यापन भी पूरा किया।
पुलिस विभाग द्वारा जारी अधिकृत विवरण के अनुसार इस बड़ी मुहिम के दौरान 2013 किलोग्राम डोडा पोस्त को पूरी तरह नष्ट किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों से संबंधित 10.767 किलोग्राम गांजा भी इस कार्रवाई के तहत जलाया गया। नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप को डिस्पोजल कमेटी के सामने लाया गया था। इस दौरान 302.73 ग्राम एमडी और 343.54 ग्राम स्मैक का भी निस्तारण किया गया। इस प्रकार सभी थानों से रिकॉर्ड जुटाकर सामूहिक रूप से करोड़ों के मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
विभिन्न कानूनी मामलों से जुड़ी 54.83 ग्राम एमडीएमए की मात्रा को भी वैज्ञानिक पद्धति से समाप्त किया गया है। इसके अतिरिक्त कार्रवाई में 59 नशे की प्रतिबंधित टैबलेट्स को भी शामिल कर नष्ट किया गया। इस प्रकार विभिन्न थानों में दर्ज कुल 130 मामलों की नशीली सामग्री को जलाकर वैधानिक कार्रवाई सफलतापूर्वक पूर्ण की गई। इस प्रक्रिया के माध्यम से पुलिस ने नशीली दवाओं और अवैध पदार्थों के स्टॉक को पूरी तरह साफ कर दिया है ताकि समाज को इस गंभीर समस्या से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
इस संपूर्ण विधिक कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर चक्रवर्ती सिंह राठौड़ मुख्य रूप से आयोजन स्थल पर उपस्थित रहे। उनके साथ ड्रग्स डिस्पोजल कमेटी के अन्य अधिकृत सदस्य भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए वहां मौजूद रहे। पूरी कार्रवाई को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए कमेटी के सदस्यों ने सभी दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन किया। बीकानेर को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पुलिस का यह एक बेहद सराहनीय कदम है जिसकी हर स्तर पर चर्चा हो रही है।
नियमों के तहत प्रतिबंधित सामग्री को भट्टी में डालकर नष्ट किया गया ताकि पर्यावरण को भी कोई नुकसान न पहुंचे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भविष्य में भी तस्करों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के सफल संचालन से आम जनता के बीच पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। अधिकारियों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में करोड़ों के मादक पदार्थ नष्ट करने पर पुलिस तंत्र की सक्रियता को महत्वपूर्ण बताया।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस द्वारा निरंतर सूचनाएं संकलित की जा रही हैं। अवैध मादक पदार्थों की जब्ती के बाद उनके विधिक निस्तारण की यह समयबद्ध प्रक्रिया कानूनी तौर पर बेहद आवश्यक मानी जाती है। इससे थानों के मालखानों में सुरक्षित रखी सामग्री का सही प्रबंधन होता है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं। पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में हुई इस कार्रवाई से विभाग की कार्यप्रणाली में तेजी देखने को मिली है।
इस निस्तारण अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस प्रशासन नशे के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शनिवार को हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिला पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी प्रभारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पुलिस विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत सुगमता से करोड़ों के मादक पदार्थ नष्ट हो सकें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मादक पदार्थों की जब्ती और विधिक निस्तारण से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के लिए पाठकों को जिला पुलिस प्रशासन द्वारा जारी अधिकृत प्रेस नोट को ही प्रामाणिक मानना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।