दिल्ली

मेडिकल डिवाइस नियम में संशोधन से अब आसान होगा लाइसेंस पाना

केंद्र सरकार ने चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता बनाए रखने और व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से मेडिकल डिवाइस नियम में बड़े बदलाव करने की तैयारी की है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से मेडिकल डिवाइस नियम 2017 में संशोधनों का एक अहम प्रस्ताव रखा है। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न जोखिम श्रेणियों वाले चिकित्सा उपकरणों के लिए विनिर्माण लाइसेंस जारी करने की समयसीमा को युक्तिसंगत बनाना है। इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में एक अधिसूचना प्रकाशित की गई है जिसके माध्यम से सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। [1]

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य देश में व्यापार करने की सुगमता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नियामक दक्षता में सुधार करना और देश के भीतर उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों की समय पर उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। इस नए मेडिकल डिवाइस नियम के तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाया जा सके ताकि मरीजों को भी इसका लाभ मिल सके।

नया वर्गीकरण

मौजूदा चिकित्सा उपकरण नियमों के तहत सभी उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों क्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी में वर्गीकृत किया गया है। इसमें क्लास डी श्रेणी के अंतर्गत सबसे अधिक जोखिम वाले उपकरणों को शामिल किया गया है। नियम प्रत्येक श्रेणी के विनिर्माण लाइसेंस के आवेदनों के प्रसंस्करण के लिए वैधानिक समयसीमा निर्धारित करते हैं। प्रस्तावित संशोधन गुणवत्ता और प्रदर्शन के स्थापित मानकों को बनाए रखते हुए इन समय सीमाओं को कम करने का प्रयास करते हैं ताकि मंजूरी तेजी से मिल सके।

क्लास बी के तहत आने वाले कम से मध्यम जोखिम वाले चिकित्सा उपकरणों जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुई और पल्स ऑक्सीमीटर के लिए विनिर्माण लाइसेंस देने की समयसीमा को 140 दिनों से घटाकर अब 115 दिन करने का प्रस्ताव दिया गया है। नया मेडिकल डिवाइस नियम उद्योग जगत को नई गति देगा। इसके अतिरिक्त क्लास सी और क्लास डी के उच्च जोखिम वाले उपकरणों जैसे कार्डियक स्टेंट, हिप और नी इम्प्लांट के लिए समयसीमा को 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।

प्रक्रिया में सुधार

प्रस्तावित मसौदे में लाइसेंसिंग प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। इसमें आवेदनों की गहन संवीक्षा, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन का सत्यापन और लाइसेंस जारी करना शामिल है। उम्मीद है कि इससे नियामक ढांचे में अधिक पारदर्शिता, पूर्वानुमान और दक्षता आएगी जिसका लाभ सीधे तौर पर उद्योग और मरीजों दोनों को मिलेगा। नया मेडिकल डिवाइस नियम स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है जिससे देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।

इस महत्वपूर्ण संशोधन की पूरी अधिसूचना आधिकारिक राजपत्र और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी के लिए उपलब्ध करा दी गई है। सभी संबंधित हितधारकों को निर्धारित अवधि के भीतर अपने बहुमूल्य कमेंट्स और सुझाव जमा करने के लिए आमंत्रित किया गया है ताकि अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों के विचारों को इसमें समाहित किया जा सके। इस नए मेडिकल डिवाइस नियम को लागू करने से पहले सरकार पूरी गंभीरता से सभी सुझावों पर विचार करेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य नियामक संबंधी नवीनतम सरकारी नीतियों के सटीक अपडेट के लिए हमेशा आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों और राजपत्र का अवलोकन करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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