पवित्र देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा को देखने के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा
पुरी, ओडिशा। देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी के इस तटीय शहर में लाखों श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। इस विशेष दिन बारहवीं शताब्दी के ऐतिहासिक मंदिर के भीतर भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों का पारंपरिक स्नान अनुष्ठान सोमवार सुबह तड़के संपन्न हुआ। देश के कोने-कोने से आए भक्त इन पूजनीय देवी-देवताओं की एक झलक पाने के लिए अत्यधिक उत्सुक दिखाई दे रहे थे। इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। [विडियो]
भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के इस पावन अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को उनके गर्भगृह से पूरे आदर और सम्मान के साथ बाहर निकाला गया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के सामने मुख्य मंच पर तीनों विग्रहों को पूरी तरह सार्वजनिक रूप से 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया। इस भव्य दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर और उसके आसपास जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसी पावन दिन प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने भी पुरी समुद्र तट पर रेत से एक सुंदर कलाकृति बनाकर भगवान जगन्नाथ को अपनी विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।
VIDEO | Renowned artist Sudarshan Patnaik creates sand art tribute to Lord Jagannath at Puri Beach on Deva Snana Purnima.#Puri #OdishaNews
— Press Trust of India (@PTI_News) June 29, 2026
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हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के इस दिव्य अनुष्ठान का अपना एक विशिष्ट महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में देव स्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ के प्राकट्य दिवस अर्थात उनके जन्मदिवस के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को राजा इंद्रद्युम्न ने पहली बार इन लकड़ी के विग्रहों की स्थापना करवाई थी और उनका महास्नान कराया था। तभी से इस परंपरा का निर्वहन निरंतर किया जा रहा है और इसी कारण से भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा को सनातन धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार का दर्जा प्राप्त है।
STORY | Lakhs witness Lord Jagannath's 'Snan Yatra' in Odisha's Puri
— Press Trust of India (@PTI_News) June 29, 2026
The ceremonial bathing ritual of Lord Jagannath and his siblings was held within the 12th-century shrine early on Monday, as the seaside town of Puri witnessed the influx of lakhs of devotees eager to catch a… pic.twitter.com/aRQHXUXE6Q
पौराणिक कथाओं में यह भी वर्णित है कि इस भव्य सामूहिक स्नान के पश्चात अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण भगवान बीमार पड़ जाते हैं। इस स्थिति को स्थानीय भाषा में 'अनासर' कहा जाता है जिसके तहत भगवान अगले 15 दिनों तक एक गुप्त कक्ष में विश्राम करते हैं। इस एकांतवास के दौरान किसी भी आम श्रद्धालु को उनके दर्शन करने की अनुमति नहीं होती है। इस अवधि में उन्हें केवल विशेष जड़ी-बूटियों का भोग लगाया जाता है। इसके ठीक बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और प्रसिद्ध रथ यात्रा पर निकलते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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