प्रादेशिक

कब तक बोरवेल बनेंगे काल? एक मासूम और लड़ रहा ज़िंदगी की जंग

हरियाणा के धनौरा गांव में एक चार वर्षीय मासूम के बोरवेल में गिरने से यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिर कब तक बोरवेल बनेंगे काल और हमारी व्यवस्था सोई रहेगी।

By अजय त्यागी 1 min read
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कब तक बोरवेल बनेंगे काल

अंबाला, हरियाणा। हरियाणा के अंबाला जिले के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती धनौरा गांव में आज सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र और सामाजिक चेतना को हिलाकर रख दिया है। यहाँ अपने परिजनों के साथ खेत पर गया एक चार साल का मासूम बच्चा निर्भय अचानक पैर फिसलने के कारण दो सौ बीस फीट गहरे खुले पड़े बोरहोल में समा गया। इस भयावह हादसे के बाद से पूरे देश में एक बार फिर यह ज्वलंत और तीखा सवाल गूंजने लगा है कि आखिर कब तक बोरवेल बनेंगे काल जो हंसती-खेलती मासूम जिंदगियों को असमय लील रहे हैं। [विडियो]

राहत अभियान

प्राप्त विवरण के अनुसार पीड़ित बच्चा सुबह के समय अपने दादा को भोजन देने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खेतों की तरफ गया हुआ था। इसी दौरान वहां खेलते समय वह अचानक नौ इंच व्यास वाले एक संकीर्ण और असुरक्षित गड्ढे की चपेट में आ गया। इस अप्रत्याशित घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीमों ने बिना कोई समय गंवाए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि बच्चे को सुरक्षित निकाला जा सके।

विशेषज्ञों और सैन्य जवानों की देखरेख में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से पाइप के जरिए बच्चे तक निरंतर ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही एक उच्च क्षमता वाले कैमरे को गड्ढे के भीतर उतारकर बच्चे की शारीरिक स्थिति और उसकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। इस संकरे रास्ते में बचाव कार्य के दौरान कई कठिन तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, जिससे यह चिंता और गहरी हो गई है कि आखिर कब तक बोरवेल बनेंगे काल और ऐसे हादसों पर पूर्णविराम कब लगेगा।

"यह घटना सुबह करीब 6:30 बजे रिपोर्ट की गई थी। लगभग 3.5 से 4 वर्ष की आयु का एक बच्चा जिसका नाम निर्भय है, अपने पिता को खाना देने आया था। जब उसके पिता काम में व्यस्त थे, तब बच्चा खेल रहा था और लगभग 9 इंच व्यास वाले एक खुले बोरहोल में गिर गया। हमारे आकलन के आधार पर, बच्चा लगभग 220 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। हमारी आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई, और सेना तथा एनडीआरएफ की टीमें भी आ गई हैं। एनडीआरएफ बच्चे को बचाने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग कर रहा है, जबकि सेना से भारी उपकरण भी मंगवाए गए हैं..." — अजय तोमर, उपायुक्त अंबाला

ज्वलंत सवाल

घटनास्थल पर इस समय हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्र हैं और बच्चे की कुशलता के लिए लगातार प्रार्थना की जा रही है। जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए समानांतर गड्ढे की खुदाई के लिए भारी मशीनों, पोकलेन और क्रेन को काम पर लगा दिया है। सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है क्योंकि जमीनी स्तर पर बरती जा रही ढिलाई के कारण ही यह सवाल उठता है कि कब तक बोरवेल बनेंगे काल और मासूमों की बलि चढ़ती रहेगी।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रतिपल समीक्षा कर रहे हैं। खुले छोड़े गए इस मौत के कुएं ने स्थानीय जवाबदेही को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। सेना के इंजीनियर और आपदा प्रबंधन के जवान अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं ताकि निर्भय को मौत के मुंह से खींचकर बाहर लाया जा सके। पूरे देश की नजरें इस रेस्क्यू के परिणाम पर टिकी हैं और हर नागरिक प्रशासन से यही पूछ रहा है कि आखिर कब तक बोरवेल बनेंगे काल और कब ऐसे मामलों में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। नागरिक सुरक्षा के प्रति सचेत रहें और अपने आसपास के खुले बोरवेल को तुरंत ढकना सुनिश्चित करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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