राष्ट्रीय

अरुणाचल में चीनी कैंप की रिपोर्ट खारिज भारतीय सेना का खंडन आया सामने

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित करने के दावों पर भारतीय सेना का खंडन आया है जिसमें इन मीडिया रिपोर्टों को निराधार बताया गया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा हाल ही में शिविर स्थापित करने या भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण करने के दावों वाली सभी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सोमवार देर रात जारी एक आधिकारिक बयान में सेना ने इन खबरों को गलत और बिना किसी आधार के बताया है। [1]

वास्तविक स्थिति

दरअसल यह पूरा मामला तक्सिंग के एक सामुदायिक संगठन नाह वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अपर सुबनसिरी जिले के उपायुक्त को सौंपे गए एक ज्ञापन से शुरू हुआ था। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि चीनी सेना ने तक्सिंग सर्कल के पास भारतीय क्षेत्र के भीतर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है। सेना ने इन सभी दावों पर भारतीय सेना का खंडन जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।

स्थानीय संगठन ने आरोप लगाया था कि चीनी बलों ने उन स्थानों पर सड़कों, पुलों और सैन्य शिविरों का निर्माण किया है जिनका उपयोग स्थानीय समुदाय मवेशी चराने और शिकार के लिए करते थे। ज्ञापन में दावा किया गया था कि वर्ष 2020 के बाद इन गतिविधियों में तेजी आई है लेकिन भारतीय सेना का खंडन इसे पूरी तरह भ्रामक करार दे रहा है।

"हमने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए द्वारा हाल ही में किए गए अतिक्रमण और शिविर स्थापित करने का आरोप लगाने वाली कुछ मीडिया रिपोर्टें देखी हैं। ये रिपोर्टें गलत और बिना किसी आधार के हैं..." — भारतीय सेना

स्थिर स्थिति

इस बीच निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी स्पष्ट किया कि चीन सीमा पर स्थिति संवेदनशील होने के बावजूद पूरी तरह स्थिर है। गलतफहमियों को रोकने और नियमित सीमा मुद्दों को हल करने के लिए दोनों सेनाएं सालाना 1100 से अधिक जमीनी स्तर की बातचीत करती हैं। इस तरह के गंभीर सुरक्षा मामलों पर आधिकारिक चैनलों के अलावा किसी भी अन्य स्रोत पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

निवर्तमान सेना प्रमुख ने एएनआई को बताया कि विघटन समझौतों ने जमीनी स्तर पर स्थिरता सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जब भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के अलग-अलग दृष्टिकोणों के कारण स्थानीय मुद्दे उठते हैं, तो उन्हें सैन्य स्तर की बातचीत, हॉटलाइन और फ्लैग मीटिंग के माध्यम से सुलझाया जाता है। भारत और चीन के बीच राजनयिक स्तर पर भी सीमा मामलों के लिए कार्य तंत्र की बैठकें रचनात्मक रही हैं जिससे द्विपक्षीय संबंधों के क्रमिक सामान्यीकरण की दिशा में प्रगति हुई है। भारतीय सेना का खंडन सामने आने के बाद नाह वेलफेयर सोसाइटी का दावा कोई मायने नहीं रखता। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सीमा सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील खबरों की सत्यता जांचने के बाद ही उन पर भरोसा करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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