राजस्थान

कोटा विश्वविद्यालय की उपलब्धि: छात्रों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग

कोटा विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत उज्बेकिस्तान की सिल्क रोड यूनिवर्सिटी के साथ शैक्षणिक सत्र हेतु एक महत्वपूर्ण साझेदारी हासिल की है।

By अजय त्यागी 1 min read
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कोटा विश्वविद्यालय को मिला अंतरराष्ट्रीय सहयोग

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत शिक्षा के क्षेत्र में कोटा विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में स्थित विख्यात सिल्क रोड इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ टूरिज्म एंड कल्चरल हेरिटेज ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए पूरे भारतवर्ष में से केवल कोटा विश्वविद्यालय को अपने एकमात्र साझेदार संस्थान के रूप में चयनित किया है।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. बी.पी. सारस्वत के कुशल मार्गदर्शन तथा पर्यटन एवं आतिथ्य विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनुकृति शर्मा के सतत प्रयासों से यह बड़ी वैश्विक सफलता हासिल हुई है। इस ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारतीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का एक बेहतरीन मंच उपलब्ध होगा।

छात्रवृत्ति योजना

विदेशी विश्वविद्यालय के प्रथम उपकुलपति प्रशासन डी. नसीमोव ने प्रो. डॉ. अनुकृति शर्मा को भेजे अपने आधिकारिक पत्र में इस सुनहरे अवसर का भारतीय विद्यार्थियों एवं स्नातकों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने का विशेष अनुरोध किया है। इस साझेदारी के तहत भारतीय छात्र-छात्राओं के लिए कुल पांच पूर्ण ग्रांट आधारित विशेष छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं।

इस योजना में चयनित अभ्यर्थियों को पढ़ाई के लिए प्रतिमाह पांच सौ अमेरिकी डॉलर की राशि छात्रवृत्ति के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त रहने के लिए सौ अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह छात्रावास व्यय के रूप में तथा भारत से उज्बेकिस्तान आने-जाने के लिए इकोनॉमी क्लास का हवाई टिकट भी पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

शैक्षणिक पाठ्यक्रम

पर्यटन एवं प्रबंधन जैसे आधुनिक विषयों के प्रति वर्तमान में विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इस अनूठे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत चयनित होने वाले प्रतिभावान विद्यार्थी उज्बेकिस्तान में रहकर पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन, पुरातत्व, कला एवं स्थापत्य स्मारकों की बहाली, संग्रहालय विज्ञान, संरक्षण तथा ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों में मास्टर डिग्री प्राप्त कर सकेंगे।

इसके साथ ही छात्रों को उज्बेकिस्तान की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों से अच्छी तरह परिचित कराने के लिए वर्ष में दो बार विशेष अध्ययन यात्राएं भी कराई जाएंगी। इन यात्राओं के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को सौ अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि एक अगस्त निर्धारित की गई है।

वैश्विक अवसर

कुलगुरु प्रो. डॉ. बी.पी. सारस्वत ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बड़ी उपलब्धि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय साख और शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप हमारा संस्थान विद्यार्थियों को वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

यह महत्वाकांक्षी छात्रवृत्ति योजना उज्बेकिस्तान सरकार की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग नीति के तहत पूर्णतः संचालित की जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक समन्वय स्थापित करना है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दोनों देशों के शोध कार्यों को गति मिलेगी और विद्यार्थियों के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना, विदेशी विश्वविद्यालयों के नियमों अथवा आवेदन की अंतिम तिथियों की विस्तृत जानकारी के लिए हमेशा संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट या प्रवेश प्रकोष्ठ द्वारा जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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