डेंगू संक्रमण का खतरा बांग्लादेश में इस कदर बढ़ रहा है कि मानसूनी बारिश और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
ठहरे हुए पानी में पनपते मच्छर
ढाका, बांग्लादेश। बांग्लादेश में आगामी दो महीनों के भीतर डेंगू के मामलों में अप्रत्याशित और भारी उछाल आ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लगातार हो रही बारिश, उमस भरे मौसम और मच्छर नियंत्रण के नाकामी प्रयासों के कारण देश में डेंगू संक्रमण का खतरा बेहद गंभीर हो सकता है। हाल के हफ्तों में इस बीमारी के प्रसार में आई खतरनाक तेजी ने साल 2023 में मची तबाही की यादें ताजा कर दी हैं, जो देश का अब तक का सबसे घातक आउटब्रेक था। [1]
स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई के अंत में जहां डेंगू से केवल 1 मौत दर्ज की गई थी, वहीं जून के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 18 हो चुका है। इसी तरह रिपोर्ट किए गए संक्रमण के मामले भी मई के 714 से आठ गुना से अधिक बढ़कर जून में 5,924 तक पहुंच गए हैं। लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के कीटविज्ञानी प्रोफेसर कबीरुल बशर ने स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि जुलाई के महीने में ढाका में डेंगू के मामले जून की तुलना में कम से कम दोगुने होने की आशंका है। इसके साथ ही अगस्त तक स्थिति और विकराल हो सकती है, जिससे देशव्यापी स्तर पर डेंगू संक्रमण का खतरा तीन से चार गुना तक बढ़ जाएगा।
उन्होंने आगाह किया है कि इस बार असली और बड़ी चुनौती राजधानी ढाका से बाहर के इलाकों में होगी। ढाका के बाहर कई ऐसे जिले हैं जहां संक्रमण की रफ्तार बेहद तेज और अनियंत्रित हो सकती है। गौरतलब है कि साल 2023 में बांग्लादेश में 3,21,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 1,705 लोगों की जान गई थी। इसके बाद साल 2024 में 1,01,214 मामले और 575 मौतें दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1,02,861 मामलों और 413 मौतों पर रहा।
बांग्लादेश के लिए यह संकट ऐसे समय पर आया है जब देश पहले से ही दशकों के सबसे खराब खसरा (मीजल्स) आउटब्रेक से जूझ रहा है। मार्च के मध्य से अब तक खसरे के 1,00,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 10,000 से ज्यादा पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिससे बच्चों की मौत का आंकड़ा 700 पार हो गया है। इस दोहरे संकट और बढ़ते डेंगू संक्रमण का खतरा झेलने में देश की पहले से ही कमजोर और जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है।
कीटविज्ञानी बशर के अनुसार, इस साल हुई भारी बारिश, लगातार बने उच्च तापमान और हवा में अत्यधिक उमस ने एडिस मच्छरों के पनपने और डेंगू के प्रसार के लिए बिल्कुल अनुकूल माहौल तैयार कर दिया है। इसके विपरीत, प्रशासन की तरफ से मच्छरों को नियंत्रित करने के जमीनी प्रयास इस बढ़ते खतरे के मुकाबले बेहद सुस्त और अपर्याप्त साबित हुए हैं।
“मौसम की मार और लचर प्रशासनिक तैयारी के कारण आउटब्रेक को काबू में करने का समय लगातार हाथ से निकलता जा रहा है। सरकार को तुरंत राष्ट्रव्यापी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करनी चाहिए ताकि हॉटस्पॉट्स की पहचान कर इस डेंगू संक्रमण का खतरा को बढ़ने से रोका जा सके।” — प्रोफेसर कबीरुल बशर, कीटविज्ञानी
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