भारतीय रुपये का मूल्य बुधवार को एशियाई बाजारों में अन्य मुद्राओं की कमजोरी के बावजूद रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिकवाली के चलते पूरी तरह स्थिर बना रहा।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
मुंबई, भारत। घरेलू शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और एशियाई मुद्राओं में आई गिरावट के बीच बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय रुपये का मूल्य काफी हद तक अपरिवर्तित यानी स्थिर रहा। कारोबारियों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा की गई संभावित बाजार दखलअंदाजी ने अन्य एशियाई मुद्राओं की कमजोरी के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया। इसके साथ ही, विश्लेषक अब केंद्रीय बैंक की फॉरवर्ड डॉलर देनदारियों के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि मुद्रा के आगामी रुख का सटीक अनुमान लगाया जा सके।
मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि मई महीने में रिजर्व बैंक की शुद्ध फॉरवर्ड डॉलर बिक्री बढ़कर रिकॉर्ड 106.7 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। उस दौरान रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर (प्रति डॉलर करीब 97 रुपये) पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया था। हालांकि, इसके बाद से कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और नीति निर्माताओं द्वारा उठाए गए सहायक कदमों के कारण घरेलू मुद्रा में शानदार सुधार देखा गया है। [1]
बुधवार को कारोबारी सत्र के दौरान भारतीय रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.68 के स्तर पर बंद हुआ। डीलरों ने बताया कि सत्र के दौरान जब रुपया अपने इंट्रा-डे निचले स्तर 94.7450 पर पहुंचा, तब सरकारी बैंकों को बड़े पैमाने पर डॉलर बेचते हुए देखा गया, जो स्पष्ट रूप से आरबीआई की ओर से की जा रही कार्रवाई थी। बाजार में यह धारणा बेहद मजबूत है कि केंद्रीय बैंक किसी भी हाल में रुपये को 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे नहीं गिरने देगा, जिससे निवेशकों का मनोबल बढ़ा हुआ है।
इसके विपरीत, अन्य एशियाई मुद्राओं में आज 0.1% से लेकर 0.4% तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब देखी गई जब ईरान ने स्पष्ट किया कि हालिया सैन्य टकराव के बाद वह क्षेत्र का दौरा करने वाले शीर्ष अमेरिकी दूतों से कोई मुलाकात नहीं करेगा। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रही थीं, लेकिन रुपये ने अपनी मजबूती को बरकरार रखा।
बाजार विशेषज्ञों और रणनीतिकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक की भारी-भरकम फॉरवर्ड डॉलर देनदारियों को देखते हुए फिलहाल भारतीय रुपये का मूल्य एक सीमित दायरे में ही आगे बढ़ेगा। डॉलर की आवक बढ़ाने के लिए हाल ही में उठाए गए नीतिगत कदमों से फॉरवर्ड बुक के और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि वाणिज्यिक बैंक रियायती दरों पर आरबीआई के साथ डॉलर-रुपये की अदला-बदली (स्वैप) कर रहे हैं। इस प्रक्रिया से देश के मुख्य विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत सहारा मिल रहा है।
मैक्रो रणनीतिकारों के अनुसार, रिजर्व बैंक इस डॉलर प्रवाह का उपयोग अपनी फॉरवर्ड बुक के एक हिस्से को निपटाने के लिए रणनीतिक रूप से कर सकता है। हालांकि, इसमें कोई बड़ा सुधार तभी संभव होगा जब भारतीय इक्विटी बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का प्रवाह फिर से तेजी पकड़ेगा। गौरतलब है कि जून के मध्य तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 672.59 बिलियन डॉलर के बेहद मजबूत स्तर पर मौजूद था।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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