स्वास्थ्य

चिकित्सकों के समर्पण को समर्पित डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख

चिकित्सा जगत के अप्रतिम योगदान, गौरवशाली इतिहास और सरकारी टीबी उन्मूलन अभियान की जमीनी हकीकत बयां करता हमारा यह डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

चिकित्सकों के सेवा भाव को समर्पित हमारा यह डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख बताता है कि आज स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा डॉक्टरों की कर्तव्यनिष्ठता के कारण ही सुदृढ़ बना हुआ है। भारत में चिकित्सा जगत के महानायक डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म और निर्वाण दोनों एक ही तिथि यानी 1 जुलाई को हुआ था, जिसके सम्मान में केंद्र सरकार ने इस राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की आधिकारिक शुरुआत की थी। यह अवसर न केवल चिकित्सकों को सम्मानित करने का है, बल्कि समाज में डॉक्टरों की निस्वार्थ सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक राष्ट्रीय मंच भी है।

विशेषज्ञ परामर्श

हमारा यह डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख इस बार टीबी रोग पर विशेष केंद्रित है। इस विषय पर पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग चिकित्सालय में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र सौगत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए विशेष वक्तव्य जारी किया है।

“ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) एक संक्रामक रोग है जो किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को और शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है, यद्यपि नैदानिक रूप से पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों का संक्रमण) के मामले सर्वाधिक देखे जाते हैं। अनियंत्रित मधुमेह (शुगर), एचआईवी संक्रमण से पीड़ित रोगियों तथा जेल या अनाथालय जैसे सघन आवासीय परिसरों में रहने वाले व्यक्तियों में प्रतिरक्षी तंत्र (Immunity) कमजोर होने के कारण इसका जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है। पोषण की गुणवत्ता में कमी और चयापचय (Metabolism) का असंतुलन भी इसके मुख्य कारक हैं। यह मुख्य रूप से ड्रॉपलेट इन्फेक्शन (खांसी के कणों) द्वारा प्रसारित होकर फेफड़ों से रक्त प्रवाह के माध्यम से अन्य अंगों तक पहुंचती है। वर्तमान में 'ड्रग सेंसिटिव' (साधारण) और 'ड्रग रेजिस्टेंट' (गंभीर) दोनों ही श्रेणियों का उपचार संभव है। एक योग्य विशेषज्ञ के निर्देशन में 6 माह से 2 वर्ष तक नियमित चिकित्सा और उच्च प्रोटीन युक्त आहार से मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है।”

डॉ. राजेंद्र सौगत
प्रोफेसर, श्वसन रोग चिकित्सालय, बीकानेर  

 

राष्ट्रीय टीबी रिपोर्ट 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नवीनतम राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन रिपोर्ट के प्रामाणिक आंकड़े देश में टीबी नियंत्रण की वास्तविक तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष लगभग 25 लाख से अधिक टीबी मामलों को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित (Notification) किया जा रहा है, जिसमें से लगभग 93 प्रतिशत से अधिक मरीज अकेले सरकारी और निजी स्वास्थ्य प्रणालियों के माध्यम से उपचार प्राप्त कर रहे हैं। रिपोर्ट दर्शाती है कि देश में टीबी उपचार की सफलता दर (Success Rate) अब बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो डॉक्टरों के सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है।

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

इस वर्ष हमारी टीम ने स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती यानी ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की वर्तमान स्थिति पर गहन विश्लेषण किया है। इस डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख के माध्यम से हम राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के उन आंकड़ों को सामने ला रहे हैं, जिसके तहत देश को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष लाखों टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें 'निक्षय पोर्टल' के माध्यम से सीधे सरकारी योजनाओं और मुफ्त दवाओं से जोड़ा जा रहा है।

डॉक्टरों का प्रयास

इस जानलेवा बीमारी के समूल नाश के लिए सरकार द्वारा 'निक्षय पोषण योजना' के तहत मरीजों को इलाज के दौरान प्रति माह 500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। हमारा यह डॉक्टर्स डे स्पेशल आलेख इस बात की पुष्टि करता है कि फील्ड में तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी 'निक्षय मित्र' अभियान के जरिए मरीजों को गोद लेकर पोषण सामग्री भी उपलब्ध करा रहे हैं। डॉक्टरों के इन समन्वित प्रयासों और आधुनिक डॉट्स (DOTS) थेरेपी के कारण आज देश में टीबी के मरीजों के ठीक होने की दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह विशेष आलेख और रिपोर्ट सरकारी स्वास्थ्य अभियानों, आधिकारिक आंकड़ों तथा प्रमाणित चिकित्सा इतिहास पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल जनजागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। टीबी रोग के लक्षण दिखने पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में मुफ्त जांच कराएं अथवा किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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