जनकवि की याद में आयोजित समारोह में गूंजा सदीक का काव्य सन्देश। वरिष्ठ साहित्यकारों और परिजनों ने उनकी रचनाओं को याद कर दी श्रद्धांजलि।
भव्य श्रद्धांजलि समारोह
बीकानेर, राजस्थान। सुप्रसिद्ध जनकवि मोहम्मद सदीक की अट्ठाईसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजमाता सुदर्शना कला दीर्घा में एक भव्य श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशेष कार्यक्रम में शहर के गणमान्य साहित्यकारों, रचनाकारों, शायरों, पत्रकारों और परिजनों ने एकत्रित होकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध वक्ताओं ने उनके जीवन और कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि सदीक का काव्य सन्देश आज के दौर में भी समाज को सही दिशा दिखाने में पूरी तरह सक्षम है और उनकी कविताएं प्रासंगिक हैं।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जनकवि मोहम्मद सदीक का संपूर्ण साहित्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और सांप्रदायिक सद्भाव का एक जीवंत दस्तावेज है। जोशी ने सदीक साहब के साथ बिताए अपने पुराने आत्मीय संस्मरणों को भावुक होकर साझा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सदीक का काव्य सन्देश समाज में मानवीय मूल्यों और भाईचारे की स्थापना का एक सशक्त माध्यम है जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और प्रसिद्ध शायर इरशाद अज़ीज़ ने भी सदीक साहब के साथ बिताए पलों को याद किया और उन्हें इंसानियत तथा मोहब्बत का सच्चा शायर बताया। वहीं प्रसिद्ध गीतकार संजय आचार्य वरुण ने मांग उठाई कि सदीक साहब के साहित्य का गंभीर मूल्यांकन होना चाहिए और उनके नाम पर एक राज्य स्तरीय साहित्यिक पुरस्कार प्रारंभ किया जाना चाहिए। उन्होंने सदीक साहब का अत्यंत लोकप्रिय गीत आपको सलाम मेरा सबको राम राम गाकर सुनाया जिससे वहां उपस्थित सभी श्रोता पूरी तरह भावविभोर हो गए।
समारोह में सांस्कृतिक और साहित्यिक रंग बिखेरते हुए सदीक साहब की पोती और दुबई से आईं शायरा कौसर ने उनके लोकप्रिय गीतों तथा अपनी स्वरचित गजलों की शानदार प्रस्तुति दी जिससे पूरा वातावरण अत्यंत भावपूर्ण हो गया। इसके बाद वरिष्ठ कवयित्री मनीषा आर्य सोनी, संगीता सेठी और सलीम भाटी ने पीर का नीर से क्या रिश्ता है और हर उबलता साँस मेरा गीत बन गया जैसे सुमधुर गीतों की प्रस्तुतियां दीं। इन रचनाओं के माध्यम से एक बार फिर सदीक का काव्य सन्देश दीर्घा में गूंज उठा जिसे सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए अब्दुल शकूर सिसोदिया ने सदीक साहब के सम्मान में अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया जबकि बारह वर्षीय बाल कलाकार असमा ने उनकी एक प्रसिद्ध कविता का बेहद प्रभावशाली पाठ करके सभी की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन विप्लव व्यास द्वारा किया गया। इस पूरे आयोजन के दौरान उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने महसूस किया कि सदीक का काव्य सन्देश वर्तमान समय में बेहद जरूरी है क्योंकि यह लोगों को आपस में जोड़ने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
इस गरिमामयी श्रद्धांजलि समारोह में सदीक साहब की धर्मपत्नी हलीमा भाटी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी साहित्यकारों तथा परिजनों को अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान किया। स्वागत उद्बोधन शायरा कौसर भाटी द्वारा दिया गया जिन्होंने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों ने सदीक साहब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर डॉ हनुमान कस्वां, कमल रंगा और डॉ नासिर जैदी ने भी सदीक साहब के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह में राजाराम स्वर्णकार, डॉ अजय जोशी, जगदीश रत्नू, शिवप्रकाश दाधीच, इंदिरा व्यास, राजेंद्र स्वर्णकार, शिवराज भरतीय, याकूब भाटी, बरकत अली पंवार, कासिम जोइया, मंजू बानो, श्याम दिन भुट्टो, नाहिद, असअद अश्मिज़ा, नजमा भाटी, सोनिया, सुमित, समीर, नदीम, जरीना, सुबिया, परवेज और अनस सहित बड़ी संख्या में प्रशंसक मौजूद रहे। अंत में वक्ताओं ने संकल्प लिया कि सदीक का काव्य सन्देश जन-जन तक प्रसारित किया जाएगा ताकि समाज में प्रेम बना रहे और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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