राजस्थान

रोजगार और उद्योग क्षेत्र को प्रभावित करेगी नई श्रम नियमावली

भीलवाड़ा में सीआईआई और मेवाड़ चैम्बर के विशेष सेमिनार में गूंजी नई श्रम नियमावली। विशेषज्ञों ने उद्योगों और कर्मचारियों के हितों पर किया मंथन।

By अजय त्यागी 1 min read
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विशेष सेमिनार

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही नई श्रम नियमावली देश की संपूर्ण श्रम व्यवस्था में ऐतिहासिक और व्यापक परिवर्तन लेकर आने वाली है। इन नए विधिक प्रावधानों का सीधा एवं दूरगामी प्रभाव देश के समस्त उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, सेवा क्षेत्र तथा करोड़ों कर्मचारियों पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा। इसी उद्देश्य से भीलवाड़ा में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन कुंजी और मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष सेमिनार का आयोजन कर विशेषज्ञों द्वारा नवीन विधिक बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़

सेमिनार में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि नई श्रम नियमावली लागू होने से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी। कार्यस्थलों पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा वेतन की एक समान परिभाषा निर्धारित होने से उद्योगों और श्रमिकों के बीच संबंध अधिक पारदर्शी और संतुलित बनेंगे। सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि देश के अधिक से अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

इसके अंतर्गत पहली बार असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इससे लाखों ऐसे कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा जो अब तक पारंपरिक योजनाओं से पूरी तरह वंचित रहे हैं। नई श्रम नियमावली के तहत वेतन की नई परिभाषा से पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस गणना में एकरूपता आएगी जिससे कर्मचारियों के दीर्घकालीन हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

सुरक्षित कार्य वातावरण

विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन्स कोड के माध्यम से कार्यस्थलों पर सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर परिस्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उद्योगों में दुर्घटनाओं की रोकथाम, स्वास्थ्य मानकों के कड़े पालन तथा महिला कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने संबंधी विधिक प्रावधानों को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया गया है जिससे औद्योगिक उत्पादकता में वृद्धि होगी।

इसके साथ ही इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत उद्योगों और कर्मचारियों के बीच संबंधों को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। नियुक्ति, सेवा शर्तें, औद्योगिक विवादों का समाधान, छंटनी और श्रमिक संगठनों से जुड़े अनेक प्रावधानों में संशोधन कर प्रक्रियाओं को पूरी तरह सरल किया गया है। इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों से उद्योगों में विवादों के त्वरित समाधान तथा देश में दीर्घकालिक औद्योगिक शांति बनाए रखने में बहुत बड़ी सहायता प्राप्त होगी।

समय पर अनुपालन

मेवाड़ चैम्बर के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नई श्रम नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उद्योगों के मानव संसाधन, वित्त, विधिक एवं प्रशासनिक विभागों को इन नए प्रावधानों की विस्तृत जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। उद्योगों को अपनी वेतन संरचना, पीएफ, ग्रेच्युटी, सेवा नियमों, नियुक्ति पत्रों और एचआर नीतियों में समय रहते आवश्यक संशोधन करने होंगे ताकि भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी जटिलता का सामना न करना पड़े।

जागरूकता और निरंतर प्रशिक्षण के माध्यम से ही इन नए कानूनी प्रावधानों का प्रभावी एवं विधिसम्मत अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। नई श्रम नियमावली का मूल उद्देश्य देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और श्रमिकों के लिए ईज ऑफ लिविंग के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करना है। इससे एक ओर जहां उद्योगों को सरल और पारदर्शी विधिक व्यवस्था मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के श्रम अधिकार भी अधिक सुदृढ़ होंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। नए नियमों के तहत कारखानों में सभी जरूरी बदलाव करने की जिम्मेदारी पूरी तरह वहां के प्रबंधन की होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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