एक किसान ने दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए राम मंदिर चंदा विवाद में एक लाख दस हजार का चेक तत्काल बनाकर विडियो जारी किया।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
इंदौर, मध्य प्रदेश। राम मंदिर निर्माण के चंदे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है। इंदौर के देपालपुर निवासी संपन्न किसान राम सिंह मकवाना ने कांग्रेस नेता को एक लाख दस हजार रुपये का चेक देने का ऐलान किया है। किसान ने कहा कि दिग्विजय सिंह को चंदा वापस लेने के लिए अयोध्या की अदालत जाने की कोई जरूरत नहीं है। इस अनूठी पेशकश के बाद क्षेत्र में यह राम मंदिर चंदा विवाद काफी गहरा गया है। [1]
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट पर पैसों की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि वह मंदिर निर्माण के लिए दिया अपना चंदा वापस लेने के लिए अदालत में मुकदमा दायर करेंगे। इस बयान से नाराज होकर किसान राम सिंह मकवाना ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में बहुत समय बर्बाद होता है और जब तक मेरे जैसे राम भक्त मौजूद हैं, उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। [विडियो]
किसान ने आगे कहा कि उन्होंने दिग्विजय सिंह के नाम का चेक पहले से ही लिखकर अपने पास सुरक्षित रख लिया है। दिग्विजय सिंह जब भी इंदौर आएंगे, वह खुद जाकर उन्हें यह चेक सौंप देंगे या फिर उनके पते पर भिजवा देंगे। इस अनूठी पेशकश के बाद भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयानबाजी ने चल रहे राम मंदिर चंदा विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
जानकारी के अनुसार, राम सिंह मकवाना इंदौर जिले के देपालपुर के निवासी हैं और पेशे से किसान हैं। बताया जाता है कि उनके पास क्षेत्र में काफी कृषि भूमि है और वे धार्मिक कार्यों में आगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के चंदा वापस लेने वाले बयान से उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। इसी कारण उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई से एक लाख दस हजार रुपये का चेक सीधे पूर्व मुख्यमंत्री को देने का फैसला किया है।
रामभक्त किसान ने दिग्विजय सिंह को सिखाया जोरदार सबक pic.twitter.com/Njw1shgrl4
— Dharma Kathayen (@dharmakathayen) July 4, 2026
इस विकट परिस्थिति में किसान के परिजनों ने भी उनके इस फैसले का पूरा समर्थन किया है। किसान ने आम जनता से अपील की है कि मंदिर और आस्था से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार की घटनाओं में सीधा और एकमात्र गंतव्य केवल श्रद्धा होना चाहिए न कि अदालती कार्यवाही। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं और किसान का वीडियो लगातार वायरल हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव से पहले इस प्रकार के धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं। इंदौर का यह मामला भी अब केवल एक किसान की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे राज्य में एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। दोनों ही प्रमुख दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने में लग गए हैं, जिससे इस राम मंदिर चंदा विवाद से जुड़ी बयानबाजी आने वाले दिनों में और तीखी होने की पूरी संभावना है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया और स्थानीय स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी की राजनीतिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। इस खबर के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।