ट्रांसजेंडर का नया कानून लागू होने से उनके लिए जरूरी हार्मोन थेरेपी और स्वास्थ्य सेवाएं रुक गई। जिससे डॉक्टरों और मरीजों दोनों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
हैदराबाद, तेलंगाना। भारत में नया कानून लागू होने के बाद ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए चिकित्सा सेवाएं और कानूनी पहचान हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। हाल ही में किए गए कानूनी बदलावों के कारण क्लीनिकों ने ट्रांसजेंडर मरीजों का इलाज और सर्जरी को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस बदलाव के तहत अब लिंग की स्व पहचान के अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को कानूनी मान्यता प्राप्त करने के लिए डॉक्टरों के एक विशेष पैनल से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है। [1]
इस नए नियम से पहले ट्रांसजेंडर लोग किसी भी प्रमाणित डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पत्र के आधार पर ऑनलाइन माध्यम से अपने लिंग की पहचान बदल सकते थे। सरकार का दावा है कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना और सुरक्षा को बढ़ाना है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि नया कानून लागू होने से चिकित्सा क्षेत्र में अनिश्चितता बहुत ज्यादा बढ़ गई है जिससे मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि पैनल में कौन से विशेषज्ञ शामिल होंगे और वे किस प्राधिकरण के प्रति जवाबदेह होंगे इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। इस वजह से कई बड़े अस्पतालों और निजी क्लीनिकों ने कानूनी पचड़ों से बचने के लिए अपनी सेवाएं रोक दी हैं। चिकित्सा जगत इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इस तरह अचानक हार्मोन थेरेपी रोकने से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उनकी शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
अचानक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी बंद होने से शरीर के आंतरिक तंत्र में गड़बड़ी हो सकती है जिससे हड्डियों के घनत्व में कमी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है। कार्यकर्ताओं को डर है कि कड़े सरकारी नियमों और दस्तावेजों की जटिलता के कारण ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग अनियंत्रित और अवैध चिकित्सा पद्धतियों की तरफ रुख कर सकते हैं। इससे झोलाछाप डॉक्टरों का धंधा बढ़ेगा और मरीजों की जान को हर समय बड़ा खतरा बना रहेगा।
भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय पहले से ही सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करता रहा है और अब यह नया कानून लागू होने से उनकी कूटनीतिक और सामाजिक लड़ाई और कठिन हो गई है। चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कई लोगों ने अपनी सर्जरी और इलाज को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने देश के भीतर एक नए जन स्वास्थ्य संकट को जन्म दे दिया है जिसका समाधान जल्द से जल्द निकाला जाना बेहद जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वास्थ्य अधिकारों और नए कानूनी संशोधनों के प्रभावों को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।