महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं ने भयंकर तबाही मचाई है जिसके कारण अब तक तेरह लोगों की जान जा चुकी है।
खड़े वाहनों पर गिरा पेड़
मुंबई, महाराष्ट्र। राज्य आपदा परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण करीब सौ से अधिक घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस भीषण आपदा की वजह से सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं और चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आ रहा है। तटीय और पश्चिमी इलाकों में मानसून की सक्रियता सबसे अधिक देखी गई है। लोनावला में पिछले अड़तालीस घंटों के दौरान रिकॉर्ड तोड़ छह सौ पच्चीस मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है जिसने जनजीवन ठप कर दिया है। [1]
रायगढ़ ठाणे रत्नागिरी और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में भी मूसलाधार पानी बरस रहा है। भारी बारिश के चलते राज्य की प्रमुख नदियां जैसे उल्लास कालू और पिंजल अपने चेतावनी स्तर को पार कर चुकी हैं। इसके अलावा आंबा सावित्री कुंडलिका और जगबुड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदियों के उफान पर होने के कारण बदलापुर और मोहने जैसे निचले इलाकों में प्रशासन द्वारा बाढ़ का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।
मुंबई के मानखुर्द इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के ढहने से छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। ठाणे और सिंधुदुर्ग में भी भूस्खलन और जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो चुका है। तेज हवाओं के कारण सिंधुदुर्ग में तीस से ज्यादा मकान ढह गए हैं। सतारा जिले में हुए भूस्खलन की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए हैं। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बहुत बढ़ गया है।
#BREAKING : 13 Dead as Torrential Rains Lash Maharashtra, Red Alert Issued for Hill Stations
— upuknews (@upuknews1) July 7, 2026
Maharashtra is witnessing one of its most severe monsoon spells this season. At least 13 people have died and 10 others have been injured as torrential rain triggered floods, landslides,… pic.twitter.com/zMOkqF7ZNZ
प्रशासन ने माथेरान लोनावला और खोपोली जैसे हिल स्टेशनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ की टीमों को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है। मावल तालुका में एक घर पर मलबा गिरने से कई लोग फंस गए थे जिन्हें सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा एक बाढ़ प्रभावित मार्ग पर फंसी बस के पच्चीस यात्रियों को भी रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बचा लिया है। रायगढ़ में बाढ़ के पानी के बीच फंसे एक परिवार को नावों की मदद से निकाला गया।
आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि मलबे में दबे लोगों को जल्द से बाहर निकाला जा सके। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। भारी बारिश के इस मौसम में सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के लिए पुलिस और स्थानीय निकाय चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी से अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
इस भयंकर प्राकृतिक आपदा के कारण मुंबई गोवा राजमार्ग और मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। काशेडि घाट में भूस्खलन के कारण सड़कों पर मलबे का ढेर लग गया जिसे हटाने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मावल और ताम्हिणी घाट भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जिसके चलते वाहनों को दूसरे वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ा गया है। दूसरी तरफ विदर्भ क्षेत्र में अभी तक मानसून की बेरुखी बनी हुई है और वहां के जिलों में सूखा है।
यातायात को सुचारू बनाने के लिए क्रेन और कंक्रीट हटाने वाली मशीनों को युद्धस्तर पर काम में लगाया गया है। दोपहर बाद मुख्य मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया था लेकिन मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करें। प्रशासन लगातार स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कंट्रोल रूम के माध्यम से पल-पल की जानकारी साझा कर रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट महाराष्ट्र में मानसून की स्थिति और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।