उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर दान घोटाला मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं।
राम मंदिर, अयोध्या
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष दल ने मंदिर में चंदा गिनती के दौरान हुई कथित अनियमितताओं पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट के सामने आने के बाद मंदिर परिसर में हड़कंप मच गया है। एसआईटी की जांच के दौरान यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया के दौरान बेहद सुनियोजित तरीके से नकदी की चोरी की जा रही थी। [1]
इस गहन एसआईटी की जांच में सत्ताईस अप्रैल से पांच जून दो हजार छब्बीस के बीच के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। इस दौरान लगभग सत्तर ऐसे मामले सामने आए जहां गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों के बंडल और खुले पैसे अपने कपड़ों और जूतों में छिपा रहे थे। इस मामले में प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने के बाद अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इन आरोपियों के बैंक खातों के विश्लेषण से यह पता चला है कि उनके खातों में जमा की गई राशि उनके सामान्य वेतन से कई गुना अधिक थी। इस मामले में एसआईटी की जांच प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इन संदिग्ध आरोपियों के पास से लगभग अठहत्तर लाख चौरानवे हजार रुपये की भारी नकदी और अन्य कई सामग्रियां बरामद की जा चुकी थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस रिपोर्ट में सुरक्षा और पर्यवेक्षण के स्तर पर हुई बड़ी लापरवाहियों को उजागर किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ किए गए विस्तृत समझौते और मानक संचालन प्रक्रिया के बावजूद कई महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। मंदिर परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों पर कर्मचारियों की उचित तलाशी नहीं ली जाती थी। इस दौरान एसआईटी की जांच में पाया गया कि वहां बायोमेट्रिक हाजिरी और दान पेटियों की चाबियों के सुरक्षित रख-रखाव को लेकर भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।
कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड लागू न करने और गिनती कक्ष के भीतर व्यक्तिगत सामान ले जाने पर प्रतिबंध न लगाने जैसी गंभीर खामियां भी रिपोर्ट में सामने आई हैं। पूर्व ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा और गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को उनके पर्यवेक्षण में हुई इस भारी चूक के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया है। इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद अब पूरे मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की जा रही है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सोमवार को ट्रस्ट ने नैतिक आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को तुरंत स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए कई व्यापक कूटनीतिक सुधार लागू किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर चांदी और अन्य कीमती ईंटों के गायब होने को लेकर चल रही खबरों को शुरुआती एसआईटी की जांच में पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया गया है। हालांकि भविष्य के लिए रिकॉर्ड प्रणाली को अधिक मजबूत करने की सलाह दी गई है।
विशेष दल इस मामले में आगे की कड़े एसआईटी की जांच जारी रखेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधारों के कड़े सुझाव देगा। इस खुलासे के बाद श्रद्धालुओं के बीच गहरी चिंता जरूर देखी जा रही है। इसके बावजूद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर की गतिविधियां और भक्तों द्वारा दिया जाने वाला दान बिना किसी रुकावट के पूरी तरह जारी है। इस विवाद के बाद भी आम जनता की अटूट आस्था पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन और एसआईटी की जांच के प्रशासनिक घटनाक्रम को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।