साइबर अपराधी व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करके मासूम लोगों को निवेश के नाम पर धोखाधडी का शिकार बना रहे हैं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, दिल्ली। देश में व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मासूम नागरिकों को अपने जाल में फंसाने वाले साइबर अपराधियों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने आम जनता को आगाह किया है कि वे त्वरित और गारंटीड ऊंचे मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों से पूरी तरह सावधान रहें। वर्तमान में निवेश के नाम पर धोखाधडी का यह खतरनाक खेल बहुत तेजी से फैल रहा है जिससे लोगों की गाढ़ी कमाई डूब रही है। [1]
जांचकर्ताओं के अनुसार धोखेबाज खुद को बाजार विशेषज्ञ या प्रतिष्ठित वित्तीय फर्मों का प्रतिनिधि बताकर सोशल मीडिया पर फर्जी ग्रुप बनाते हैं। वे उपयोगकर्ताओं को विशेष स्टॉक टिप्स और मनगढ़ंत सफलता की कहानियां दिखाकर आकर्षित करते हैं। इस तरह की निवेश के नाम पर धोखाधडी में अपराधियों का मुख्य हथियार लोगों का भरोसा जीतना होता है। वे पीड़ितों को आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय निजी लिंक के माध्यम से फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कूटनीतिक रूप से मजबूर करते हैं जिससे उनका डेटा और पैसा दोनों चोरी हो जाता है।
साइबर विंग के अधिकारियों ने सख्त हिदायत दी है कि किसी भी अज्ञात ग्रुप में साझा की जाने वाली वित्तीय सलाह पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले संबंधित ब्रोकर और प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है। यदि कोई मंच निश्चित रिटर्न या गारंटीड कूटनीतिक मुनाफे का दावा करता है तो उसे सीधे तौर पर खतरे का संकेत माना जाना चाहिए क्योंकि वास्तविक शेयर बाजार में ऐसे दावों की कोई कानूनी जगह नहीं होती है।
साइबर विशेषज्ञों ने इस अपराध के पीछे की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि शुरुआती दिनों में इन फर्जी ऐप पर पीड़ित को झूठा मुनाफा दिखाया जाता है। जब निवेशक उस मुनाफे की रकम को निकालने का प्रयास करता है तो धोखेबाज टैक्स या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अतिरिक्त पैसों की मांग करने लगते हैं। इस तरह की निवेश के नाम पर धोखाधडी में फंसे लोग अक्सर अपना पुराना पैसा बचाने के चक्कर में और अधिक धन जमा कर देते हैं जिससे उनका नुकसान लगातार बढ़ता जाता है।
मुंबई के एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक के साथ हुई घटना का हवाला देते हुए सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि उन्हें भी एक अज्ञात ग्रुप में जोड़कर लाखों रुपये की निवेश के नाम पर धोखाधडी का शिकार बनाया गया। जब उन्होंने अपनी कमाई वापस निकालने की कोशिश की तो उनका खाता पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया। गृह मंत्रालय की साइबर विंग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वास्तविक स्टॉकब्रोकर या वित्तीय संस्थान कभी भी फंड रिलीज करने के लिए अलग से पैसे जमा करने के लिए नहीं कहता है।
इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए जारी सरकारी परामर्श में नागरिकों से केवल आधिकारिक स्टोर से ही वित्तीय ऐप डाउनलोड करने की अपील की गई है। अज्ञात संदेशों में प्राप्त होने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना बेहद खतरनाक हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की निवेश के नाम पर धोखाधडी का शिकार बनता है तो उसे बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते कूटनीतिक स्तर पर फंड को ब्लॉक किया जा सके।
हेल्पलाइन नंबर के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के डिजिटल वित्तीय अपराधों के खिलाफ जन जागरूकता ही सबसे मजबूत और अचूक सुरक्षा कवच है। लोगों को खुद भी सतर्क रहना होगा और इस महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करना होगा ताकि समाज के अन्य लोगों को इस कूटनीतिक साइबर जाल में फंसने से सुरक्षित बचाया जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट देश में बढ़ते डिजिटल अपराधों के पैटर्न और साइबर सुरक्षा संबंधी सरकारी दिशा निर्देशों को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।