नागरिक समाज ने जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है जिसके समर्थन में नेशनल कॉन्फ्रेंस दिल्ली में प्रदर्शन करेगी।
नागरिक समाज की बैठक
श्रीनगर, जम्मू कश्मीर। जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए श्रीनगर में एक महत्वपूर्ण नागरिक समाज की बैठक का आयोजन किया गया। डल झील के किनारे शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के करीब एक सौ पचास प्रमुख नागरिक शामिल हुए। नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी बीस जुलाई को नई दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले जनसमर्थन और माहौल तैयार करना था। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटने के बाद पहली बार नागरिक समाज ने ऐसा कोई प्रस्ताव पास किया है। इस बैठक में केंद्र सरकार से बिना किसी देरी के राज्य की पुरानी स्थिति बहाल करने का पुरजोर आग्रह किया गया। [1]
फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की संयुक्त अगुवाई में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाने और साझा मोर्चा बनाने पर गंभीर चर्चा हुई। नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा धरना देने जा रही है। इस धरने में पार्टी के इकतालीस विधायक और चार सांसद शामिल होंगे जो बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे।
फारूक अब्दुल्ला ने इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए इंडिया गठबंधन के अन्य राष्ट्रीय नेताओं को भी आमंत्रित करने का फैसला किया है। पार्टी इस आंदोलन के माध्यम से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रही है। नेताओं का मानना है कि जब तक जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधूरी रहेगी। इस मुद्दे पर जनभावनाओं को जोड़ने के लिए कश्मीर के विभिन्न जिलों में बड़े सम्मेलनों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
इस बैठक के दौरान जम्मू कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर उल इस्लाम ने इस पहल की सराहना की और इसे जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उनका मानना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होना जम्मू कश्मीर के नागरिकों की संवैधानिक गरिमा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन खान ने भी व्यापारिक समुदाय की समस्याओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश होने से व्यापारिक मुद्दों के समाधान में कई तरह की प्रशासनिक बाधाएं आ रही हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बैठक को बेहद उत्पादक बताते हुए कहा कि नागरिक समाज से उन्हें मूल्यवान प्रतिक्रियाएं और सुझाव मिले हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नागरिक समाज का यह समर्थन उनकी मांग को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। पार्टी आने वाले दिनों में जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के प्रमुख संगठनों से भी संपर्क साधेगी ताकि इस आंदोलन को एक व्यापक स्वरूप दिया जा सके और केंद्र सरकार तक जनता की सामूहिक आवाज पहुंचाई जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जम्मू कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली के संबंध में केंद्र सरकार का रुख उचित समय पर निर्णय लेने का रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।