अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका ईरान संघर्ष फिर भड़का, हॉर्मुज में सीजफायर खत्म

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका ईरान संघर्ष फिर से चरम पर पहुंच गया। दोनों देशों ने एक दूसरे के ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। 

By अजय त्यागी 1 min read
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United States just bombed Iran striking a civilian port in Bandar Abbas - X [@ProudSocialist]

दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक तेल टैंकरों पर हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिका ईरान संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच जून महीने में हुआ अस्थायी सीजफायर अब पूरी तरह टूट चुका है। ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मालवाहक जहाजों और ड्रोन से किए गए हमलों ने इस पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। इस नए घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच भारी सैन्य तनाव पैदा हो गया है। [1]

अमेरिकी एयरस्ट्राइक

अमेरिकी सेना ने ईरान के इस कदम का बेहद कड़ा जवाब देते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के भीतर स्थित लगभग अस्सी से अधिक सैन्य ठिकानों पर रात भर भीषण हवाई हमले किए। इस जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका ईरान संघर्ष और अधिक आक्रामक हो गया है क्योंकि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरानी सेना की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करना था।

अमेरिकी वायुसेना के इस ऑपरेशन में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कई युद्धक नावें तटीय रडार सिस्टम और ड्रोन लॉन्च पैड पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान को मिलने वाली तेल प्रतिबंधों की अस्थायी छूट को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध भी पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।

ईरानी पलटवार

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने भी मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत के हवाई ठिकाने को मुख्य रूप से अपना निशाना बनाया है। इस जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका ईरान संघर्ष को एक नए और विनाशकारी चरण में पहुंचा दिया है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही तेहरान ने दक्षिणी ईरान के हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एमक्यू नौ रीपर ड्रोन को भी मार गिराने की घोषणा की है जिससे खाड़ी क्षेत्र में दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा सैन्य गतिरोध और गंभीर हो गया है।

वैश्विक तनाव

इस नए सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर भारी राजनयिक और आर्थिक चिंता पैदा कर दी है। ईरान के शीर्ष वार्ताकार ने अमेरिका पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा है कि वे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए और भी कड़े कदम उठाएंगे और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इस बयान के बाद अमेरिका ईरान संघर्ष के जल्द शांत होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

दूसरी ओर ब्रिटेन और नाटो ने इस मामले में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का पूरी तरह समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का मानना है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने का प्रयास कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के शोक कार्यक्रम के बीच भड़के इस युद्ध से तेल आपूर्ति ठप होने और वैश्विक बाजार में भारी उथल पुथल मचने की पूरी आशंका बनी हुई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय सैन्य घटनाक्रम तेजी से परिवर्तनशील है, अतः अधिकारिक वक्तव्यों को ही फाइनल माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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