बाज़ार और निवेश

प्रतिबंधों और हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमत में बड़ा उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और नए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से तीन फीसदी से अधिक बढ़ी।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

सिंगापुर, सिंगापुर। अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शुरू हुए नए सैन्य टकराव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तीन प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई है। दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी सीजफायर अब पूरी तरह से समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों और वाशिंगटन द्वारा तेहरान पर दोबारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद मध्य पूर्व से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं। [1]

बाजार में भारी उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को ब्रेंट क्रूड वायदा दो डॉलर चालीस सेंट बढ़कर छिहत्तर डॉलर छप्पन सेंट प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी तीन दशमलव दो प्रतिशत की बढ़त के साथ बहत्तर डॉलर सत्तर सेंट प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इस अचानक आई तेजी से विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ सकती है क्योंकि दोनों बेंचमार्क लगातार दूसरे दिन मजबूत हुए हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह हालिया सैन्य कार्रवाई ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। इन प्रभावित जहाजों में कतर का एक एलएनजी टैंकर और सऊदी अरब का एक बड़ा सुपरटैंकर शामिल था जिन पर ड्रोन से हमला किया गया था। इस घटना के बाद अमेरिका ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ईरान को मिलने वाली तेल बिक्री की विशेष छूट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया

अमेरिकी प्रतिबंधों और हवाई हमलों के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने बहरीन और कुवैत में बने अमेरिकी नौसेना के मुख्यालयों को निशाना बनाया है जिससे इस क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस भू राजनीतिक संकट के कारण वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत को लगातार समर्थन मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हॉर्मुज जलमार्ग से दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति होती है और इस मार्ग पर ईरान का नियंत्रण बढ़ना चिंताजनक है। ईरान ने अब जहाजों को ओमान के बजाय अपने तट के करीब से गुजरने का आदेश दिया है जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्वतंत्र रखने पर अड़ा है। इस विवाद के कारण विभिन्न देशों को अपनी आपातकालीन तेल सूची का उपयोग करना पड़ रहा है।

आपूर्ति संकट की आशंका

कच्चे तेल के भंडारों में आई इस कमी के कारण वैश्विक बाजार में आपूर्ति का संकट गहराता जा रहा है। अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान के आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के स्टॉक में अनुमान से कहीं अधिक गिरावट देखी गई है। विश्लेषकों का अनुमान था कि स्टॉक में लगभग चौबीस लाख बैरल की कमी आएगी लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक चिंताजनक हैं जिससे कच्चे तेल की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है।

इस समझौते के टूटने से बाजार की वह धारणा पूरी तरह बदल गई है जिसके तहत तेल की कीमतें युद्ध पूर्व स्तर पर आ गई थीं। व्यापारियों ने पहले कीमतों में गिरावट की उम्मीद में बड़े शॉर्ट दांव लगाए थे लेकिन अब आपूर्ति बाधित होने के डर से वे अपने सौदे काटने को मजबूर हैं। अगर यह तनाव लंबा खिंचता है और जलमार्ग से यातायात आधा रह जाता है तो वैश्विक बाजार में ईंधनों की आपूर्ति बेहद सीमित हो जाएगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति और सैन्य घटनाक्रम से संबंधित इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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