अंतरराष्ट्रीय

युद्ध के बीच नाटो नेताओं की बैठक में सहयोग पर गहराया संकट

अंकारा में आयोजित नाटो नेताओं की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान युद्ध और रक्षा खर्च को लेकर यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोला है।

By अजय त्यागी 1 min read
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नाटो सम्मलेन में बोलते राष्ट्रपति ट्रम्प

अंकारा, तुर्की। अंकारा में आयोजित महत्वपूर्ण नाटो नेताओं की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय सहयोगियों पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। ट्रम्प ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना का साथ न देने के लिए सहयोगी देशों की तीखी आलोचना की है। इस बैठक में पहुंचे ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर मेजबान देश के राष्ट्रपति से उनकी गहरी दोस्ती न होती तो शायद वह इस सम्मलेन का पूरी तरह से बहिष्कार कर देते। [1]

अमेरिकी हमलों का समर्थन

नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने ईरान पर हुए नए अमेरिकी हमलों को पूरी तरह से आवश्यक बताते हुए ट्रम्प की नाराजगी को शांत करने का प्रयास किया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सीजफायर का उल्लंघन होने पर अमेरिका की यह जवाबी सैन्य कार्रवाई बेहद जरूरी थी। इस शिखर सम्मलेन में नाटो नेताओं की बैठक का मुख्य उद्देश्य ट्रम्प को सैन्य गठबंधन के प्रति दोबारा प्रतिबद्ध करने के लिए राजी करना है जिसके लिए यूरोपीय देश लगातार प्रयास कर रहे हैं।

यूरोपीय देशों ने ट्रम्प की मांगों को शांत करने के लिए पचास अरब डॉलर से अधिक के नए हथियार समझौतों की घोषणा भी की है। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वह इस सैन्य गठबंधन के रवैये से बेहद निराश हैं क्योंकि ईरान संकट के समय अमेरिका के साथ ठीक से व्यवहार नहीं किया गया। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि संकट के समय यूरोपीय देशों ने अपनी हवाई सीमा और सैन्य ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी थी।

इटली और डेनमार्क से बढ़ा विवाद

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पुराने सहयोगी और इटली के प्रधानमंत्री की भी खुलकर आलोचना की है जिससे आपसी संबंधों में कड़वाहट आ गई है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मामले में मदद न करने के कारण उनके रिश्ते अब थोड़े खराब हो गए हैं। नाटो नेताओं की बैठक से ठीक पहले आए इस बयान ने यूरोपीय राजनयिकों के बीच भारी खलबली मचा दी है जिसे सुधारने का प्रयास लगातार जारी है।

दूसरी ओर ट्रम्प ने डेनमार्क के अधीन आने वाले ग्रीनलैंड क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण होने की पुरानी मांग को दोबारा दोहराकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पर पलटवार करते हुए डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटो गठबंधन की स्थापना ही एक दूसरे की रक्षा करने के उद्देश्य से की गई थी।

सामूहिक रक्षा का संकल्प

इन तमाम आपसी मतभेदों के बीच सभी बत्तीस देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने सामूहिक रक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त करने वाले एक साझा घोषणापत्र को मंजूरी दी है। यह घोषणापत्र आधिकारिक रूप से जारी होने के लिए पूरी तरह तैयार है। नाटो नेताओं की बैठक में अमेरिकी प्रशासन ने यूरोप से अपने सैनिकों को वापस बुलाने और रक्षा बजट का बोझ खुद उठाने का दबाव लगातार बनाया हुआ है।

यूरोपीय देश सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं लेकिन वे चाहते हैं कि यह बदलाव बेहद व्यवस्थित तरीके से हो ताकि उनकी सीमाओं पर कोई सुरक्षा चूक न हो। इस संकट के समय यूरोपीय अधिकारियों को उम्मीद है कि ट्रम्प के तुर्की और नाटो प्रमुख के साथ अच्छे संबंध इस शिखर सम्मेलन के तनाव को कम करने में मददगार साबित होंगे। इस बैठक के परिणामों पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नाटो संगठन के शिखर सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक घटनाक्रम से संबंधित इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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